"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

रविवार, 21 अक्तूबर 2012

"ब्लॉगिंग एक नशा नहीं आदत है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


काफी समय पहले मैंने लिखा था-
‘‘क्या ब्लॉगिंग एक नशा है?’’
आप सब ने उस पर भाँति-भाँति की प्रतिक्रियाएँ टिप्पणी के रूप में मुझे उपहार में दीं थी।
आज मैं लिख रहा हूँ कि ब्लॉगिंग एक नशा नही बल्कि आदत है।
मेरी दिनचर्या रोज सुबह एक लोटा जल पीने से शुरू होती है। उसके बाद नेट खोलकर लैप-टाप में मेल चैक करता हूँ। इतनी देर में प्रैसर आ जाता है तो शौच आदि से निवृत हो जाता हूँ।
प्रैसर आने में यदि देर लगती है तो दो-तीन मिनट में ही कुछ शब्द स्वतः ही आ जाते हैं और एक रचना का रूप ले लेते हैं।
क्या लिखता हूँ? कैसे लिखता हूँ? यह मुझे खुद भी पता नही लगता।
ब्लॉग पर मैंने क्या लिखा है? इसका आभास मुझे तब होता है जब आप लोगों की प्रतिक्रियाएँ मिलतीं हैं।
चार साल पूर्व तो कापी-कलम संभाल कर लिखता था। एक-एक लाइन को कई-कई बार काट-छाँटकर गढ़ने की कोशिश करता था।
महीना-पन्द्रह दिन में एक आधी लिख गई तो अपने को धन्य मान कर अपनी पीठ थप-थपा लिया करता था। परन्तु, जब से नेट चलाना आ गया है। तब से कापी कलम को हाथ भी नही लगाया है।
नेट-देवता की कृपा से और माँ सरस्वती के आशीर्वाद से प्रतिदिन-प्रतिपल भाव आते हैं और आराम से ब्लाग पर बह जाते हैं।
जब ताऊ रामपुरिया उर्फ पी0सी0 मुद्गल ने मेरा साक्षात्कार लिया था तो मुझसे एक प्रश्न किया था कि आप ब्लॉगिंग का भविष्य कैसा देखते हैं?
उस समय तो यह आभास भी नही था कि इस प्रश्न का उत्तर क्या देना है?
बस मैंने तुक्के में ही यह बात कह दी थी कि- ब्लॉगिंग का भविष्य उज्जवल है।
लेकिनआज मैं यह दावे के साथ कह सकता हूँ कि ब्लॉगिंग का भविष्य उज्जवल है और यह एक नशा नही बल्कि एक आदत है।
यह आदत अच्छी है या बुरी यह तो आप जैसे सुधि-जन ही आकलन कर सकते हैं।
दुनिया भर के साहित्यिक लोगों से मिलने का, उनके विचार जानने का और अपने विचारों को उन तक पहुँचाने का माध्यम ब्लॉगिंग के अतिरिक्त दूसरा हो ही नही सकता।

18 टिप्‍पणियां:

  1. मै तो कहता हूं कि बीमारी है , साक्षात दुनिया में मिलना जुलना भी लोगो से कम हो गया है

    उत्तर देंहटाएं
  2. जुआँ खेलना छूटता, नहिं दारु के घूँट ।

    धूम्रपान की लत गई, क्लब ही जाये छूट ।

    क्लब ही जाये छूट , मित्र कुछ अच्छे पाए ।

    पथ जाएँ गर भटक, मार्ग सच्चा दिखलायें ।

    घर में किच-किच ख़त्म, किन्तु कुछ उठे धुआँ है ।

    सूर्पनखा से बचा, जिन्दगी एक जुआँ है ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. हमारी भी आदतों में शामिल हो गया है यह विश्व..

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपने सही कहा,,,,,ब्लोगिंग नशा नही आदत है,,,और इसका भविष्य उज्वल है ,,,

    RECENT POST : ऐ माता तेरे बेटे हम

    उत्तर देंहटाएं
  5. उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. ब्लागिंग जुनून है, ये आपको हमेशा जीवित रखती है। आपकी सोचने की समक्षा बढाती है।आप के मन में खाते, पीते उठते बैठते कुछ ना कुछ चल रहा होता है। बस एक कोशिश हमें ये करनी है कि जो कुछ मन में चल रहा है कि उसे सकारात्मक दिशा दे दें। ऐसा ना हो कि इसे गलत दिशा में मोड़ दे।
    बहुत सार्थक लेख..

    उत्तर देंहटाएं
  7. स्वस्थ ब्लागिंग आशीर्वाद है ईश्वर का.

    उत्तर देंहटाएं
  8. ब्लोगिंग तो नशा भी है और आदत भी.क्यूँ की कभी कभी नशा उतर भी जाता है.उस समय आदत भी छुट जाती है.और कभी कभी आदत कुछ ज्यादा ही नशा कर जाती है.

    इंडियन ब्लोगर्स वर्ल्ड

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह!
    आपकी इस ख़ूबसूरत प्रविष्टि को कल दिनांक 22-10-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1040 पर लिंक किया जा रहा है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  10. सही कहा ब्लोगिंग अब आदत बन चुका है ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. आदत तो है, लेकीन फिर भी आदत तो बुरी नहीं है.. चलने दो भाई.. लिखते रहो..

    उत्तर देंहटाएं
  12. अरे इस अगर आदत से नशा भी हो रहा है तो होने भी दीजिये ना वैसे पीने वाले को पियक्कड़ बोला जाता है ब्लागिंग करने वाले को क्या कहा जाये? :)

    उत्तर देंहटाएं
  13. उस समय तो यह आभास भी नही(नहीं ) था कि इस प्रश्न का उत्तर क्या देना है?

    ब्लोगिंग के बारे में बस यह ही -

    एक आदत सी हो गई है ,तू

    और आदत कभी नहीं जाती ,

    ज़िन्दगी है के जी नहीं जाती ,

    ये जुबां हमसे सी नहीं जाती .

    ब्लोगिंग ने लिखाड़ी को सम्पादक के वर्चस्व से मुक्त किया है .एक क्लिक के साथ आप दुनिया भर में पहंच जाते

    हैं .अखबार इन्टरनल फ्लाईट है ब्लोगिंग अंतर -राष्ट्रीय उड़ान फिर नशा तो होगा ही अलबत्ता यह नशा सात्विक

    है .पर ज्यादा न पी जाए यह मय भी .बढ़िया पोस्ट है शास्त्री जी की .

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपकी इस बात से सहमत हूँ की ब्लोगिंग एक आदत है और मेरा भी मानना यही है की इंसान जो भी काम करता है वो उसकी आदत का ही एक हिस्सा है वो अपनी आदतों से इस कदर जुड़ा हुआ है की अगर वो इसे न करे तो उसे कुछ छूटता सा लगता है फिर वो चाहे ब्लॉग हो या कोई और चीज़ | अच्छा लेख |

    उत्तर देंहटाएं
  15. ब्‍लागिंग में प्रतिक्रिया शीघ्र मिलती है, इसलिए यहाँ लेखन बहुआयामी हो जाता है। लेकिन कई विवाद भी उग्र हो जाते हैं, वह लेखन के लिए उचित नहीं हैं।

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails