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सोमवार, 22 अक्तूबर 2012

"गंगा का अस्तित्व बचाओ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


नद-नालों, सरिताओँ को भी,
जो खुश होकर अंग लगाती।
धरती की जो प्यास बुझाती,
वो पावन गंगा कहलाती।।

आड़े-तिरछे और नुकीले,
पाषाणों को तराशती है।
पर्वत से मैदानों तक जो,
अपना पथ खुद तलाशती है।
गोमुख से सागर तक जाती।
वो पावन गंगा कहलाती।।

फसलों को नवजीवन देती,
पुरखों का भी तर्पण करती।
मैल हटाती-स्वच्छ बनाती,
मन का निर्मल दर्पण करती।
कल-कल, छल-छल नाद सुनाती।
वो पावन गंगा कहलाती।।

चलना ही जीवन होता है
जो रुकता है वो सड़ जाता,
जो पत्रक नहीं लहराता है,
वो पीला पड़कर झड़ जाता।
चरैवेति सन्देश सिखाती।
वो पावन गंगा कहलाती।।

मैला और विषैला पानी,
गंगा में अब नहीं बहाओ।
समझो अपनी जिम्मेदारी,
गंगा का अस्तित्व बचाओ।
जो अपने पुरखों की थाती।
वो पावन गंगा कहलाती।।

17 टिप्‍पणियां:

  1. मसला गंभीर है,
    उसी गंभीरता से आपने विषय को उठाया भी


    चलना ही जीवन होता है
    जो रुकता है वो सड़ जाता,
    जो पत्रक नहीं लहराता है,
    वो पीला पड़कर झड़ जाता।
    चरैवेति सन्देश सिखाती।
    वो पावन गंगा कहलाती।।

    बहुत सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  2. बिल्कुल सही चित्रण किया है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर सन्देश परक शिक्षा प्रद कविता जब तक जनजागरण नहीं होगा गंगा का अस्तित्व यूँ ही खतरे में पड़ता रहेगा बहुत बहुत बधाई शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  5. बढ़िया , आप तो किसी भी विषय पर धारा प्रवाह गीत लिख सकते हैं ..आपको भी दुर्गाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं
  6. गंगा की रक्षा एक संस्कृति की रक्षा है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. गंगाकी स्थिति बेहद खराब है. काश कि आपके मनोभावों से हम लोग सबक ले सकें.

    उत्तर देंहटाएं
  8. ये प्रयास तो बहुत जल्द होना चाहिए बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति.सार्थक प्रस्तुति हेतु साधुवाद
    दुर्गा अष्टमी की सभी को हार्दिक शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुन्दर गीत ...
    बस आपकी पुकार सुन् ली जय...

    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  10. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा मंगलवार २३/१०/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका स्वागत है

    उत्तर देंहटाएं


  11. नद-नालों, सरिताओँ को भी,
    जो खुश होकर अंग लगाती।
    धरती की जो प्यास बुझाती,
    वो पावन गंगा कहलाती।।
    चिंता इस दौर में यह है अब गंगा मैली ही नहीं ज़हरीली हो गई है कैंसर रोग समूहों की वजह बन रहा है गंगा जल .गंगा किनारे बसेरा करने वाले इस रोग समूह की चपेट में हैं .

    उत्तर देंहटाएं
  12. 'भारत की संस्कृति'की पहँचान है गंगा |
    देश का जीवन है,जान है गंगा ||

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  13. बहुत सुन्दर शब्द गंगा के बारे में.

    उत्तर देंहटाएं
  14. हम सब अपनी जिम्मेदारी समझे !
    सार्थक आह्वान !

    उत्तर देंहटाएं
  15. सार्थकता लिये सशक्‍त अभिव्‍यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  16. सही में एक सार्थक प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं

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