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बुधवार, 24 अक्तूबर 2012

"!!रावण या रक्तबीज!!" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

विजयादशमी (दशहरा) 
की 
हार्दिक शुभकामनाएँ!
!!रावण या रक्तबीज!!
आज
दशहरा है
राक्षसों के
गगनचुम्बी पुतले
मैदान में सजे हैं
रामलीला मैदान में
मेला लगा है
लोगों की भीड़ में
श्री राम के
जय के उद्घोष के साथ
पुतलों का के साथ
युद्ध शुरू हो चुका था
नवयुग की
यही तो मर्दानगी है।
--
इस मेले से
चार बालाएँ
गुम हो गई हैं
बार-बार
एक ही प्रश्न
मन में उठ रहा था
"रावण को तो राम ने
रामलीला में मार दिया है’’
फिर किस से राक्षस ने
चार सीताओं का हरण किया।
--
तभी ध्यान आया
रावण आमआदमी नहीं
रक्तबीज है कोई
एक मरता है
हजार जन्म ले लेते हैं
उन्हीं में से 
किसी ने
इन चार सीताओं का
हरण किया होगा!

19 टिप्‍पणियां:

  1. इस युग में "रावण" होते तो फिर भी ठीक था

    कम से कम उसे धर्म अधर्म का ज्ञान तो था

    चार चार सीता का हरण करने वालों को

    रक्तबीज ही कहना उचित होगा ......आज की

    स्थिति परिस्थिति का सही चित्रण ......

    विजयादशमी की बहुत बहुत शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  2. बढिया पोस्ट

    विजयदशमी की बहुत बहुत शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  3. सच लिखा आपने । हर साल रावण को जलाते हैं और हर साल अपहरणों, बलात्कारों की संख्या में बढ़ोतरी होती है !
    बुराइयों को खत्म करें कागज़, लकड़ी को फूँकने से क्या लाभा !

    उत्तर देंहटाएं
  4. रोष रावण पर निकलेगा..आप सबको भी विजयादशमी की शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  5. .बहुत सुन्दर व् सार्थक अभिव्यक्ति .आपको विजयदशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपसे मिलने अवश्य आना पड़ेगा. ढ़ेरो शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  8. चाहे जितना मारो, रक्तबीज रावण कभी नही मरेगा,,,,

    विजयादशमी की हादिक शुभकामनाये,,,
    RECENT POST...: विजयादशमी,,,

    उत्तर देंहटाएं
  9. शुभकामनायें ||
    बढ़िया नवगीत ||

    उत्तर देंहटाएं
  10. विजयादशमी की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  11. ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ
    ♥(¯*•๑۩۞۩~*~विजयदशमी (दशहरा) की हार्दिक बधाई~*~۩۞۩๑•*¯)♥
    ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ

    संसद से सड़क तक रावण बहुत हो गए हैं .सबसे आसान काम है इस दौर में सीता का अपहरण .इतने राम कहाँ से लायें .सीता वज्र पहनकर आयें .

    उत्तर देंहटाएं
  12. संसद से सड़क तक रावण बहुत हो गए हैं .सबसे आसान काम है इस दौर में सीता का अपहरण .इतने राम कहाँ से लायें .सीता वज्र पहनकर आयें .

    उत्तर देंहटाएं
  13. रावण घटने का नाम ही नहीं ले रहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत जबरदस्त व्यंग्य पूर्ण प्रस्तुति बधाई आपको

    उत्तर देंहटाएं
  15. सुंदर व्यंग्यपूर्ण प्रस्तुति।।।

    उत्तर देंहटाएं
  16. झंझोर दिया आपकी इस कविता ने .....आज का कटु सत्य ......सच में आज का रावण रक्त बीज की ही देन है ...जो हर युग में मिलेगा

    उत्तर देंहटाएं
  17. जितनी भी प्रशंसा करूँ,कम है .... आपके अनुभवी शब्दों ने स्तब्ध केर दिया है

    उत्तर देंहटाएं

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