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शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

"विजय त्यौहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


rama killing ravanaआओ मिल-जुलकर मनाएँ, 
इस विजय त्यौहार को। 
बाँट दें सारे जगत में, 
सत्य के उपहार को।। 
girlछा गया कुहरा घना, 
अब नगर में और गाँव में, 
नाचती ललनाएँ, 
देखो राम की लीलाओं में, 
देह के व्यापार में , 
सूली चढ़ी आचार को। 
बाँट दें सारे जगत में, 
सत्य के उपहार को।। 
Ravana_fizzlesदेश में केवल हमारे, 
मात्र पुतला जल रहा, 
दुष्ट रावण तो दिलों में, 
पुष्ट होकर पल रहा, 
आओ सच्चा पथ दिखाएँ, 
स्वयं को परिवार को। 
बाँट दें सारे जगत में, 
सत्य के उपहार को।। 
नेक-नीयत से सदा,
बढ़ता दिलों में प्यार है, 
छल, कपट और दम्भ की, 
होती हमेशा हार है, 
हम बुराई से बचाएँ, 
इस कुटिल संसार को। 
बाँट दें सारे जगत में, 
सत्य के उपहार को।। 

15 टिप्‍पणियां:

  1. प्रभावशाली प्रस्तुति ||

    बहुत-बहुत बधाई ||

    शुभ विजया ||

    उत्तर देंहटाएं
  2. sub vijaya
    bahut sundar
    kavi ki kavita, ka keya kahana
    har aak chand may may kavi kahe

    उत्तर देंहटाएं
  3. सत्य का उपहार है,
    विजय का त्योहार है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर और प्रभावशाली रचना... बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  5. भाव भरी पोस्ट।
    भक्ति से भर गया मन।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बढ़िया कविता. विजयादशमी की हार्दिक शुभकामना.

    उत्तर देंहटाएं
  7. देश में केवल हमारे,
    मात्र पुतला जल रहा,
    दुष्ट रावण तो दिलों में,
    पुष्ट होकर पल रहा,
    आओ सच्चा पथ दिखाएँ,
    स्वयं को परिवार को।
    बाँट दें सारे जगत में,
    सत्य के उपहार को।।


    सत्य को दर्शाती सार्थक रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  8. भावभरी रचना।
    विजयादशमी पर्व की शुभकामनाएं....

    उत्तर देंहटाएं
  9. बाँट दें सारे जगत में
    सत्य के उपहार को...

    वाह! बहुत पावन भाव मयी रचना...
    सादर..

    उत्तर देंहटाएं

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