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शनिवार, 15 अक्तूबर 2011

" आज करवाचौथ पर" ( डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

थक गईं नजरें तुम्हारे दर्शनों की आस में।
आ भी आओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में।।

चमकते लाखों सितारें किन्तु तुम जैसे कहाँ,
साँवरे के बिन कहाँ अटखेलियाँ और मस्तियाँ,
गोपियाँ तो लुट गईं है कृष्ण के विश्वास में।
आ भी आओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में।।

आ गया मौसम गुलाबी, महकता सारा चमन,
छेड़ती हैं साज लहरें, चहकता है मन-सुमन,
पुष्प, कलिकाएँ, लताएँ मग्न हैं परिहास में।
आ भी आओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में।।

आज करवाचौथ पर मन में हजारों चाह हैं,
सब सुहागिन तक रही केवल तुम्हारी राह हैं,
चाहती हैं सजनियाँ साजन बसे हों पास में।
आ भी आओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में।।

27 टिप्‍पणियां:

  1. गीतिका छंद का स्मरण करा रही है आप की यह प्रस्तुति। करवा चौथ पर उम्दा पेशकश। बधाई।

    गुजर गया एक साल

    उत्तर देंहटाएं
  2. खुबसूरत समन्वय सिध्हस्त करों से ,बस इतना ही कहना है सलामती की दुआओं के साथ ,मुबारकबाद .....सर !

    उत्तर देंहटाएं
  3. Nice post.

    एग्रीगेटर्स के होने और न होने को बराबर कर देने के लिए आपका शुक्रिया !

    See
    लक्ष्मण को इल्ज़ाम न दो

    उत्तर देंहटाएं
  4. पुष्प, कलिकाएँ, लताएँ मग्न हैं परिहास में।
    आ भी जाओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में।।

    बहुत ही सुन्दर रचना है शास्त्री जी सचमुच
    बहुत बहुत बधाई हो आपको
    मैं क्षमा चाहूँगा जो इतने दिनों से सोच रहा हू की मैं आखिरकार कब से अपनी चर्चाएं लगाना शुरू करू पर क्या करू मैं थोडा सा व्यस्त हो गया था सो नहीं कर पाया पर अब जरुर प्रयास करूँगा मैं जल्द ही सम्पर्क करता हूँ आपसे इस सम्बन्ध में

    उत्तर देंहटाएं
  5. देखिए अब हम तो आ ही गए .हैं ..चन्द्रमा भी आ ही जाएगा शास्त्री जी --करवां-चौथ की बहुत-बहुत बधाई ..

    उत्तर देंहटाएं
  6. दीपावली में लक्ष्मी पूजन से पहले आज लक्ष्मी जी के वाहक उल्लुओं का पूजन होगा :)

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह ! बहुत खूब ! आ भी जाओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में ! बहुत-बहुत बधाई इस खूबसूरत रचना के लिए .

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  8. खूबसूरत रचना।
    करवा चौथ की शुभकामनाएं.............

    उत्तर देंहटाएं
  9. आदरणीय मयंक जी नमस्काअर, आपने सुन्दार पक्तियां करवाचौथ पर लिखी है ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. चमकते लाखों सितारें किन्तु तुम जैसे कहाँ,
    साँवरे के बिन कहाँ अटखेलियाँ और मस्तियाँ,
    गोपियाँ तो लुट गईं है कृष्ण के विश्वास में।
    आ भी आओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में।।

    वाह आपने तो आज के दिन का बहुत सुन्दर खाका खींचा है…………सुन्दर रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  11. हमें तो वाकई यही कहना पढता है ...आ भी जाओ चंद्रमा..
    बहुत सुन्दर.

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  12. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ||
    शुभ-कामनाएं ||

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  13. पतिव्रताओं के मर्म को अच्छा स्वर दिया आपने।

    उत्तर देंहटाएं
  14. चन्द्रमा सा ही खूबसूरत गीत!

    उत्तर देंहटाएं

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