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रविवार, 9 अक्तूबर 2011

" दिवस त्यौहार के आए" ( डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 महकता गन्ध से उपवन,
धरा ने रंग विखराए।
खुशी से खिल उठे चेहरे,
दिवस त्यौहार के आए।।
 
सुशोभित कमल सुन्दर हैं,
सजे फिर से सरोवर हैं,
सिँघाड़ों की फसल फिर से,
हमारे ताल ले आये।
खुशी से खिल उठे चेहरे,
दिवस त्यौहार के आए।।
 
बढ़ी बाजार में रौनक,
दिये जलने लगे जग-मग,
फसल को धान की पाकर,
कृषक-मजदूर मुस्काए।
खुशी से खिल उठे चेहरे,
दिवस त्यौहार के आए।।
 
विजय का पर्व आया है,
दिवाली साथ लाया है,
सभी यह कामना करते.
कलुषता-मैल मिट जाए।
खुशी से खिल उठे चेहरे,
दिवस त्यौहार के आए।।

22 टिप्‍पणियां:

  1. दीपोत्सव की तैयारी का सजीव वर्णन !

    उत्तर देंहटाएं
  2. दीपावली के पावन पर्व की अग्रिम शुभकामनाओं सहित आदरणीय शास्त्री जी को उनकी इस सुंदर रचना के लिये बहुत बहुत बधाई व आभार…

    उत्तर देंहटाएं
  3. महकता गन्ध से उपवन,
    धरा ने रंग विखराए।
    खुशी से खिल उठे चेहरे,
    दिवस त्यौहार के आए।।

    धर्म, पर्व किसी भी रूप में सिर्फ और सिर्फ दिखावे के लिए नहीं बनाये गये हैं। कहीं न कहीं इनके द्वारा मानव को कुछ न कुछ सीख भी देने का कार्य किया जाता है .

    उत्तर देंहटाएं
  4. अच्‍छी प्रस्‍तुति।
    दीपावली की तैयारी का सुंदर चित्रण।

    उत्तर देंहटाएं
  5. खूबसूरत प्रस्तुति ||
    बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर, सरस गीत सर...
    सादर बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  7. कलुषता-मैल मिट जाए।
    खुशी से खिल उठे चेहरे,
    दिवस त्यौहार के आए।।
    खुबसूरत सदाबहार रचना सर ! कविता के साथ पावन पर्वों की खुशीयाँ मुबारक /

    उत्तर देंहटाएं
  8. आते त्यौहार की सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह ...बहुत खूब कहा है आपने
    बधाई उत्कृष्ट रचना के लिए......
    महर्षि निर्वाण दिवस भी आ रहा है आप क्या कर रहे हैं आशा है खुबसूरत सदाबहार रचना मिलेगी.......

    उत्तर देंहटाएं
  10. आते त्यौहार की सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  11. खूबसूरत प्रस्तुति ||
    बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह , सिंघाड़े पर पर भी शानदार प्रस्तुति । पर्व की खुशियाँ यत्र तत्र बिखरी हुयी हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत ही सुन्दर खुशियो का आगमन दर्शाती प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  14. एक सुन्दर भाव लिए रचना |
    बधाई
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत ही अच्छी रचना,दीपावली की बधाईयाँ !

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  16. शास्‍त्रीजी सिंघाडों की याद दिला दी। यहाँ उदयपुर में कभी-कभार ही दर्शन होते हैं। जयपुर में तो भरमार थी। बहुत सशक्‍त रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  17. ऋतुरंजित यह रचना .. बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं

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