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सोमवार, 31 अक्तूबर 2011

"गुम हो गया किरदार है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मतलबी संसार में गुम हो गया किरदार है
हर जगह पर हो रहा ईमान का व्यापार है

कंटकों ने ओढ़ ली, चूनर सुमन की चमन में
हाथ मत आगे बढ़ाना, बेध देगा ख़ार है

क्या खिलाएँ और खाएँ, है मिठासों में जहर,
ज़िन्दगी को मुँह चिढ़ाते, नाम के त्यौहार हैं

डाल पर बैठा परिन्दा, सोच में बैठा हुआ
खेत से दानों का, सारा मिट गया भण्डार है

अब नहीं बाकी बचा, कुछ भी फ़िजाओं में हुनर
शालीनता के भेष में, अश्लीलता दमदार है

दिल की कोटर में, छिपा बैठा मलिन-मन
मनचले भँवरे को केवल रूप से ही प्यार है

23 टिप्‍पणियां:

  1. बेहद सुन्दर और सटीक बात कही है आपने ...जमाने की पोल पट्टी.. सार्थक रचना

    उत्तर देंहटाएं
  2. सामाजिक सत्य को बिम्बों से व्यक्त करती कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  3. ज़िन्दगी को मुँह चिढ़ाते, नाम के त्यौहार हैं
    सटीक बात!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही संदेशपूर्ण व यथार्थपरक रचना !

    उत्तर देंहटाएं
  5. क्या खिलाएँ और खाएँ, है मिठासों में जहर, ज़िन्दगी को मुँह चिढ़ाते, नाम के त्यौहार हैं

    लाज़बाब शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  6. दिल की कोटर में, छिपा बैठा मलिन-मनमनचले भँवरे को केवल “रूप” से ही प्यार है........bahut khoob babu ji...aabhar

    उत्तर देंहटाएं
  7. मतलबी संसार में गुम हो गया किरदार है
    हर जगह पर हो रहा ईमान का व्यापार है

    अब नहीं बाकी बचा, कुछ भी फ़िजाओं में हुनर
    शालीनता के भेष में, अश्लीलता दमदार है

    सटीक,सुन्दर ग़ज़ल........!!

    उत्तर देंहटाएं
  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. डाल पर बैठा परिन्दा, सोच में बैठा हुआ
    खेत से दानों का, सारा मिट गया भण्डार है..
    सटीक लिखा है आपने! तस्वीर बहुत सुन्दर है, बोलती हुई तस्वीर है! सुन्दर सन्देश देती हुई उम्दा रचना!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ही संदेशपूर्ण व यथार्थपरक रचना|

    उत्तर देंहटाएं

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