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शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2011

"चलो दीपक जलाएँ हम" ( डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

हुआ मौसम गुलाबी अब,
चलो दीपक जलाएँ हम।
घरों में धान आये हैं,
दिवाली को मनाएँ हम।

बढ़ी है हाट में रौनक,
सजी फिर से दुकानें हैं,
मधुर मिष्ठान को खाकर,
मधुर वाणी बनाएँ हम।

मनो-मालिन्य को अपने,
मिटाने का समय है अब,
घरों के साथ आँगन को,
करीने से सजाएँ हम।

छँटें बादल गगन से हैं,
हुए निर्मल सरोवर हैं,
चलो तालाब में अपने,
कमल मोहक खिलाएँ हम।

सुमन आवाज देते हैं,
चलो सींचे बगीचों को,
चमन मैं आज फिर से,
कुछ नये पौधे उगाएँ हम।

29 टिप्‍पणियां:

  1. खूबसूरत प्रस्तुति |

    त्योहारों की नई श्रृंखला |
    मस्ती हो खुब दीप जलें |
    धनतेरस-आरोग्य- द्वितीया
    दीप जलाने चले चलें ||

    बहुत बहुत बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  2. दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. पूरे शबाब पर है दीवाली का बाजार।
    शुभकामनाएं.......

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी इस पोस्ट को पढ़कर यहाँ विदेश में होने के बावजूद भी दिवाली आने का एहसास जाग गया और आँखों के सामने अपने यहाँ जो दिवाली पर माहौल बनाना शुरू हो जाता है उसका एक चल चित्र सा चलने लगा है। बहुत बढ़िया पोस्ट...आपको भी दीपावली की अग्रिम शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  5. छँटें बादल गगन से हैं,
    हुए निर्मल सरोवर हैं,
    चलो तालाब में अपने,
    कमल मोहक खिलाएँ हम।

    बहुत ही अच्छे उद्गार।
    दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएँ सर!

    ----
    कल 22/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  6. bhaut acchi kavita...babu ji...dipavali ki dher sari shubhkamnayen....

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह …………बहुत सुन्दर आह्वान्।

    उत्तर देंहटाएं
  8. ढेरों शुभकामनायें दीपावली की |

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुंदर उद्गारो की अच्छी प्रस्तुती बढिया पोस्ट,बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  10. बड़ा ही सरस/प्रवाहित गीत है सर,
    सादर बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  11. सुमन आवाज देते हैं,
    चलो सींचे बगीचों को,
    चमन मैं आज फिर से,
    कुछ नये पौधे उगाएँ हम।
    क्या बात है सर , प्रगतिशील सृजन नए आयाम का सम्बहन,शुभ कामनाएं .../

    उत्तर देंहटाएं
  12. छँटें बादल गगन से हैं,
    हुए निर्मल सरोवर हैं,
    चलो तालाब में अपने,
    कमल मोहक खिलाएँ हम।
    अहा!
    दीपावली अबके ऐसा ही प्रकाश सबके मन में बिखेरे।

    उत्तर देंहटाएं
  13. सुमन आवाज देते हैं,
    चलो सींचे बगीचों को,
    चमन मैं आज फिर से,
    कुछ नये पौधे उगाएँ हम।

    बहुत खूब !!

    उत्तर देंहटाएं
  14. "चमन मैं आज फिर से,
    कुछ नये पौधे उगाएँ हम।"


    "चलो इस बार मिल कर
    फिर नए दीपक जलाएं हम""

    दीवाली की शुभ कामनाएं....

    उत्तर देंहटाएं
  15. छँटें बादल गगन से हैं,
    हुए निर्मल सरोवर हैं,
    चलो तालाब में अपने,
    कमल मोहक खिलाएँ हम।
    दिवाली कि हार्दिक शुभकामनायें!
    सभी पंक्तियाँ बहुत हि सुन्दर!

    उत्तर देंहटाएं
  16. दीपावली पर सुंदर प्रेरणा देती कविता में आनंदित कर दिया.

    उत्तर देंहटाएं
  17. सुन्दर और सार्थक आह्वान|दीवाली की शुभ कामनाएं|

    उत्तर देंहटाएं
  18. बहुत सुन्दर कविता...दिवाली की शुभकामनाएँ|

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत सुन्दर...दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  20. दीपावली पर आपने लाजवाब रचना लिखा है! बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  21. मौसम बदलते हैं,जीवन में नयापन,नई आशाएं जाग जाती हैं.सुंदर रचना.

    उत्तर देंहटाएं

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