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रविवार, 23 अक्तूबर 2011

"हर आइना कमजोर है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


पत्थरों के देश में, हर आइना कमजोर है
आदमी के वेश में, इन्सान आदमखोर है

है हवाओं में जहर, हर ओर बरपा है कहर
लूट-हत्याओं का आलम, छा रहा हर ओर है

स्नेह बिन कैसे जलेगा, भाईचारे का दिया
नफरतों ने काट दी, सम्बन्ध की अब डोर है

घोसलों की हो हिफाजत, अब यहाँ कैसे भला
पेड़ की हर शाख़ पर, बैठा हुआ जब चोर है

दूध की अब है सुरक्षा, बिल्लियों के हाथ में
अंजुमन में हो रहा अब, बन्दरों का शोर है

रूप के मेले लगे हैं, बिक रही है आबरू
आज भ्रष्टाचार का, कुछ ओर है ना छोर है

25 टिप्‍पणियां:

  1. एक सटीक व सार्थक अभिव्यक्ति।

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  2. पूरा सटीक... आज कि व्यवस्था, इंसानों के आचरण, और राजनीती का पूरा दृश्य दिखाती|
    दीवाली कि हार्दिक शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  3. स्नेह बिन कैसे जलेगा, भाईचारे का दिया
    नफरतों ने काट दी, सम्बन्ध की अब डोर है
    ..sach jitna log bewajah nafrat karne lagte hai utna bewajah prem nahi kar paate...

    घोसलों की हो हिफाजत, अब यहाँ कैसे भला
    पेड़ की हर शाख़ पर, बैठा हुआ जब चोर है
    ..bahut sahi baat...
    saarthak prastuti..
    aapko Deep parv kee spariwar haardik shubkamnayen!

    उत्तर देंहटाएं
  4. स्थिति परिस्थिति का चित्र खींचती सटीक रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  5. दूध की अब है सुरक्षा, बिल्लियों के हाथ में
    अंजुमन में हो रहा अब, बन्दरों का शोर है

    बिलकुल सटीक बात कही सर!

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  6. सादर,शुभ- कामनाये सर! , खुबसूरत अभिव्यक्ति को सम्मान ,पावन पर्व की मुबारकवाद पहुचे ./

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  7. बहुत सुंदर और सत्य का दर्शन कराती कविता...

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी यह उत्कृष्ट प्रविष्टि कल दिनांक 24-10-2011 के सोमवारीय चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर भी होगी। सूचनार्थ

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  9. बहुत उम्दा ग़ज़ल सर,
    बधाई...
    आपको सपरिवार दीप पर्व की सादर बधाईयां....

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  10. शुभकामनाएं ||

    रचो रंगोली लाभ-शुभ, जले दिवाली दीप |
    माँ लक्ष्मी का आगमन, घर-आँगन रख लीप ||
    घर-आँगन रख लीप, करो स्वागत तैयारी |
    लेखक-कवि मजदूर, कृषक, नौकर व्यापारी |
    नहीं खेलना ताश, नशे की छोडो टोली |
    दो बच्चों का साथ, रचो मिलकर रंगोली ||

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  11. बदलना होगा जीवनशैली को ..
    सपरिवार आपको दीपावली की शुभकामनाएं !!

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  12. बहुत अच्छे भाव,सामाजिक परिवेश को दर्शाति उत्कृष्ट रचना,बधाई! दिपावली की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  13. मौजूदा समय में समाज में फैली कुव्‍यवस्‍थाओं पर चोट करती पोस्‍ट।
    आभार.....

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  14. जीवन की सच्चाई दर्शाती रचना सुंदर पोस्ट बधाई .....दीपावली की हार्दिक शुभकामनाए ,......

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  15. सार्थक अभिव्यक्ति
    आप और आपके परिवार को दिवाली की ढेरों शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं

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