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मंगलवार, 11 अक्तूबर 2011

"हजार एक सौ ग्यारह" ( डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

"हो गई 1+1+1+1"

टिके रहे हम नहीं हुए हैं,
अभी यहाँ से नौ दो ग्यारह।
ढाईसाल में पोस्ट हुई हैं,
एक हजार एक सौ ग्यारह।।

आँधी आई, पानी आया,
आई धूप और कुछ छाया,
विचलित नहीं हुए हम पथ से,
मन को कभी नहीं भटकाया,
मन की बगिया में भावों की,
आज हो गई है पौ बारह।
ढाईसाल में पोस्ट हुई हैं,
एक हजार एक सौ ग्यारह।।

जब हम नये-नये आए थे,
जान नहीं सबको पाए थे,
छोटा सा इक नीड़ बनाकर,
अपने भावों को लाए थे,
किन्तु यहाँ तो पहले से ही,
कुछ सत्रह थे, कुछ अट्ठारह।
ढाईसाल में पोस्ट हुई हैं,
एक हजार एक सौ ग्यारह।।

पश्चिम से बहता समीर था,
पूरब से बहती थी गंगा,
ऐसे में हमको लगता था,
अपना उच्चारण बेढंगा,
ब्लॉगजगत में तभी उतारे,
हमने अपने चिट्ठे तेरह।
ढाईसाल में पोस्ट हुई हैं,
एक हजार एक सौ ग्यारह।।

24 टिप्‍पणियां:

  1. बहौत-बहौत मुबारक हो यह उपलब्धि। शुभकामनायें स्वीकार करें ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुभकामनायों के साथ अगली पोस्ट का इंतज़ार

    उत्तर देंहटाएं
  3. बधाइयाँ शास्त्री जी | बधाइयाँ |
    कामना है इस संख्या (1111) में और भी "1" लगता ही जाये निरंतर | बहुत सुन्दर रचना |

    मेरी रचना भी देखें |
    मेरी कविता:

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह! बहुत बढ़िया लगा! बहुत बहुत बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  5. पौ बारह के लिए बहुत बहुत बधाई शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  6. बढ़िया प्रस्तुति |
    हमारी बधाई स्वीकारें ||


    http://dcgpthravikar.blogspot.com/2011/10/blog-post_10.html

    उत्तर देंहटाएं
  7. एक हजार एक सौ ग्यारह' के लिये हार्दिक बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाये………बहुत जल्द हों ग्यारह हजार एक सौ ग्यारह्।

    उत्तर देंहटाएं
  9. एक हजार एक सौ ग्यारह' के लिये हार्दिक शुभकामनाएँ|

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह! बहुत बढ़िया लगा! बहुत बहुत बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  11. वाह ...बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  12. कल 11/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  13. ढाईसाल में पोस्ट हुई हैं,
    एक हजार एक सौ ग्यारह।।
    .११११ पोस्ट के सफलतम प्रस्तुति हेतु हार्दिक शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं

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