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शनिवार, 11 अगस्त 2012

"दोहे-बदलेंगे तकदीर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

  दावे करते हैं सभी, बदलेंगे तकदीर।
अपनी रोटी सेंकते, राजा और फकीर।१।

झपट लिया है राम ने, अन्ना जी का पक्ष।
राजनीति के खेल में, स्वामी निकले दक्ष।२।

जिसको सर्वसमाज का, मिला हुआ हो साथ।
लोकतन्त्र परिवेश में, विजय उसी के हाथ।३।

मुखिया की चलती नहीं, सबके भिन्न विचार।
ऐसा घर कैसे चले, जिसमें सब सरदार।४।

अनशन होता सफल वो, जिसका हो आधार।
लोकतन्त्र के सामने, झुक जाती सरकार।५।

16 टिप्‍पणियां:

  1. सर झुकता है हृदय से, श्रद्धा सह विश्वास |
    चारित्रिक उत्कृष्टता, होवें लक्षण ख़ास |
    होवें लक्षण ख़ास, आज दुश्चिंता दीखे |
    लाभ हानि का खेल, सतत यह दुनिया सीखे |
    कार-बार सर कार, धार से बदला करते |
    महत्वकांक्षा प्यार, मौत वे अपनी मरते ||

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  2. सरकारों को अब इनके काम गीदड़ भभकी लगने लगे हैं

    उत्तर देंहटाएं
  3. मुखिया की चलती नहीं, सबके भिन्न विचार।
    ऐसा घर कैसे चले, जिसमें सब सरदार।४।
    ....बिलकुल सही कहा आपने ....
    सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  4. ऐसा कभी होगा लगता तो नहीं हैं ....सटीक दोहे

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर और सटीक दोहे , बहुत शानदार रचना /बहुत बधाई आपको /


    मेरे ब्लॉग में आपका स्वागत है /चार महीने बाद फिर में आप सबके साथ हूँ /जरुर पधारिये /

    उत्तर देंहटाएं
  6. मुखिया की चलती नहीं, सबके भिन्न विचार।
    ऐसा घर कैसे चले, जिसमें सब सरदार।

    आपने सही कहा ,,,,सटीक दोहे,,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  7. आज के संदर्भ में लिखे ये दोहे अच्छे लगे।

    उत्तर देंहटाएं
  8. मुखिया की चलती नहीं, सबके भिन्न विचार।
    ऐसा घर कैसे चले, जिसमें सब सरदार।४।

    सटाक सटाक करते दोहे
    सुंदर दोहे और सटीक दोहे !!

    उत्तर देंहटाएं
  9. मुखिया की चलती नहीं, सबके भिन्न विचार।
    ऐसा घर कैसे चले, जिसमें सब सरदार।

    समसामयिक दोहे ....सटीक

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत अच्छे दोहे ----पर ये सरकार कुछ ज्यादा अकड़ गई है लगता नहीं की झुकेगी ------बढ़िया सामयिक दोहे

    उत्तर देंहटाएं

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