दावे करते हैं सभी, बदलेंगे तकदीर।अपनी रोटी सेंकते, राजा और फकीर।१। झपट लिया है राम ने, अन्ना जी का पक्ष। राजनीति के खेल में, स्वामी निकले दक्ष।२। जिसको सर्वसमाज का, मिला हुआ हो साथ। लोकतन्त्र परिवेश में, विजय उसी के हाथ।३। मुखिया की चलती नहीं, सबके भिन्न विचार। ऐसा घर कैसे चले, जिसमें सब सरदार।४। अनशन होता सफल वो, जिसका हो आधार। लोकतन्त्र के सामने, झुक जाती सरकार।५। |
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |
bahut hi sateek aur sarthak dohe ! aabhar
जवाब देंहटाएंसर झुकता है हृदय से, श्रद्धा सह विश्वास |
जवाब देंहटाएंचारित्रिक उत्कृष्टता, होवें लक्षण ख़ास |
होवें लक्षण ख़ास, आज दुश्चिंता दीखे |
लाभ हानि का खेल, सतत यह दुनिया सीखे |
कार-बार सर कार, धार से बदला करते |
महत्वकांक्षा प्यार, मौत वे अपनी मरते ||
सरकारों को अब इनके काम गीदड़ भभकी लगने लगे हैं
जवाब देंहटाएंमुखिया की चलती नहीं, सबके भिन्न विचार।
जवाब देंहटाएंऐसा घर कैसे चले, जिसमें सब सरदार।४।
....बिलकुल सही कहा आपने ....
सुन्दर प्रस्तुति
ऐसा कभी होगा लगता तो नहीं हैं ....सटीक दोहे
जवाब देंहटाएंसार्थक सटीक दोहे..
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर और सटीक दोहे , बहुत शानदार रचना /बहुत बधाई आपको /
जवाब देंहटाएंमेरे ब्लॉग में आपका स्वागत है /चार महीने बाद फिर में आप सबके साथ हूँ /जरुर पधारिये /
मुखिया की चलती नहीं, सबके भिन्न विचार।
जवाब देंहटाएंऐसा घर कैसे चले, जिसमें सब सरदार।
आपने सही कहा ,,,,सटीक दोहे,,,,,
SATEEK AUR SAMKAALEEN DOHE.. BAHUT SUNDAR
जवाब देंहटाएंnice .प्रोन्नति में आरक्षण :सरकार झुकना छोड़े
जवाब देंहटाएंआज के संदर्भ में लिखे ये दोहे अच्छे लगे।
जवाब देंहटाएंमुखिया की चलती नहीं, सबके भिन्न विचार।
जवाब देंहटाएंऐसा घर कैसे चले, जिसमें सब सरदार।४।
सटाक सटाक करते दोहे
सुंदर दोहे और सटीक दोहे !!
सटीक दोहे.
जवाब देंहटाएंमुखिया की चलती नहीं, सबके भिन्न विचार।
जवाब देंहटाएंऐसा घर कैसे चले, जिसमें सब सरदार।
समसामयिक दोहे ....सटीक
बहुत अच्छे दोहे ----पर ये सरकार कुछ ज्यादा अकड़ गई है लगता नहीं की झुकेगी ------बढ़िया सामयिक दोहे
जवाब देंहटाएंप्रभावी दोहे..
जवाब देंहटाएं