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रविवार, 12 अगस्त 2012

"दोहा गीत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दोहा गीत
तन के उजले मन के गन्दे।
कितने बदल गये हैं बन्दे।।

शब्दकोश तक रह गया, अब तो जग में प्यार।
केवल सुख के वास्ते, करते सब व्यापार।।
भोग-विलासों में सब अन्धे।
कितने बदल गये हैं बन्दे।।

मतलब में पहचानते, करते प्यार-अपार।
हित-साधन के बाद में, देते हैं दुत्कार।।
निशिदिन फेंक रहे हैं फन्दे।
कितने बदल गये हैं बन्दे।।

ग्राम-नगर, परदेश में, फैला इनका जाल।
कुटिलचाल चलते हुए, कमा रहे है माल।।
दुनिया भर में फैले धन्धे।
कितने बदल गये हैं बन्दे।।

22 टिप्‍पणियां:

  1. शब्दकोश तक रह गया, अब तो जग में प्यार।
    केवल सुख के वास्ते, करते सब व्यापार।।-------------बहुत गहन बात सटीक कटाक्ष बहुत अच्छी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  2. दोहा ग़ज़ल ! यह तो कोई नया काव्यरूप लग रहा है । बढ़िया ! सुन्दर!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर। दोहा ग़ज़ल ! एक नया काव्य-रूप! अनूप !

    उत्तर देंहटाएं
  4. मतलब में पहचानते, करते प्यार-अपार।
    हित-साधन के बाद में, देते हैं दुत्कार।।
    निशिदिन फेंक रहे हैं फन्दे।
    कितने बदल गये हैं बन्दे।।

    दोहा गीत एक अलग विधा मे बहुत कडवी सच्चाइयाँ कह दीं। बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत अच्छे लगे दोहे सत्य बयान करते |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह!!
    बहुत बढ़िया शास्त्री जी....
    आपकी हर रचना एक सबक है हमारे लिए...
    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  7. निशिदिन फेंक रहे हैं फन्दे।
    कितने बदल गये हैं बन्दे।।(चलते बनते लेकर चंदे/शातिर ये दुनिया के बंदे ...) दुनिया भर में फैले धन्धे।
    कितने बदल गये हैं बन्दे।।(स्विस बैंक तक इनके फंदे ,डॉलर सबके ,हाथ हैं गंदे ..)बढिया रचना है शास्त्री जी ..... .कृपया यहाँ भी पधारें -
    शनिवार, 11 अगस्त 2012
    कंधों , बाजू और हाथों की तकलीफों के लिए भी है का -इरो -प्रेक्टिक

    उत्तर देंहटाएं
  8. शब्दकोष तक रहा गया अब तो सिर्फ प्यार
    रिश्ते व्यापार की शक्ल जो लेने लगे हैं !
    सत्य वचन !

    उत्तर देंहटाएं
  9. सब रखते बिल्ली के पंजे
    कितने बदल गये हैं बंदे!

    उत्तर देंहटाएं
  10. बड़ी सच्ची बात कही है आपने, वह भी बड़ी सरलता से..

    उत्तर देंहटाएं
  11. बिल्कुल सही और सटीक बात कही है आपने शास्त्री जी आभार..

    उत्तर देंहटाएं

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