"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

गुरुवार, 2 अगस्त 2012

"अमर रहेगा राखी का त्यौहार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आया राखी का त्यौहार!!
हरियाला सावन ले आयाये पावन उपहार।
अमर रहा हैअमर रहेगाराखी का त्यौहार।।
आया राखी का त्यौहार!!

जितनी ममता होती है, माता की मृदु लोरी में,
उससे भी ज्यादा ममता है, राखी की डोरी में,
भरा हुआ कच्चे धागों में, भाई-बहन का प्यार।
अमर रहा हैअमर रहेगाराखी का त्यौहार।।
आया राखी का त्यौहार!!

भाई को जा करके बाँधें, प्यारी-प्यारी राखी,
हर बहना की यह ही इच्छा राखी के दिन जागी,
उमड़ा है भगिनी के मन में श्रद्धा-प्रेम अपार!
अमर रहा हैअमर रहेगाराखी का त्यौहार।।
आया राखी का त्यौहार!!

खेल-कूदकर जिस अँगने में, बीता प्यारा बचपन,
कैसे याद भुलाएँ उसकी, जो मोहक था जीवन,
कभी रूठते और कभी करते थे, आपस में मनुहार।
अमर रहा हैअमर रहेगाराखी का त्यौहार।।
आया राखी का त्यौहार!!

गुज़रे पल की याद दिलाने, आई बहना तेरी,
रक्षा करना मेरे भइया, विपदाओं में मेरी,
दीर्घ आयु हो हर भाई की, ऐसा वर दे दो दातार।
अमर रहा हैअमर रहेगाराखी का त्यौहार।।
आया राखी का त्यौहार!!

आज किसी भी भाई की, ना सूनी रहे कलाई,
पहुँचा देना मेरी राखी, अरे डाकिए भाई,
बहुत दुआएँ दूँगी तुझको, तेरा मानूँगी उपकार!
अमर रहा है अमर रहेगा, राखी का त्यौहार!!
आया राखी का त्यौहार!!

21 टिप्‍पणियां:

  1. उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही सुन्दर .............रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाये

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर रचना...रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ अंकल !!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    रक्षाबन्धन के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर,प्यारी रचना..
    रक्षा बंधन की बहुत-बहुत शुभकामनाये...
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  6. इरादा मज़बूत हो तो याद दिलाने के लिए राखी का कच्चा धागा भी काफ़ी होता है।
    राखी के त्यौहार पर सभी बहनों को मुबारकबाद और भाइयों को भी।

    उत्तर देंहटाएं
  7. आदरणीय शास्त्री जी मान्या के लिये लिखे गए गीत से लेकर अब तक आपके कई गीत देखे हैं उनमें लय और माधुर्य दर्शनीय होता है । राखी गीत भी ऐसा ही है ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत बेहतरीन प्रस्तुति,,,,,

    रक्षाबँधन की हार्दिक शुभकामनाए,,,
    RECENT POST ...: रक्षा का बंधन,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत ही सुन्दर कविता..रक्षा बंधन की बहुत-बहुत शुभकामनाये..

    उत्तर देंहटाएं
  10. रक्षा बंधन पर्व की मुबारकवाद।
    कल दिन मे पूर्णिमा लगते ही 'भद्रा' भी शुरू थी और आज प्रातः 08-57 पर पूर्णिमा समाप्त होकर प्रतिपदा लग गई किन्तु आज दिन भर लोग 'राखी' का त्योहार मना रहे हैं। इसे बहन-भाई का पर्व बना दिया गया था और अब तो यह बानिज्यिक होकर रह गया है। किन्तु यह था क्या?

    जब तक 'वेदिक' सिद्धान्त चलते रहे और उनका स्थान 'पौराणिक' पोंगा-पंथ ने नहीं लिया था तब तक श्रावण शुक्ल पूर्णिमा से विद्यारंभ होता था। 08 वर्ष की आयु के बालक-बालिकाओं को गुरुकुल पढ़ने भेजने हेतु आज ही के दिन उनका 'जनेऊ' संस्कार होता था। यह 'जनेऊ' ही रक्षा-सूत्र था। इसके तीन धागे तीन प्रकार के दुखों से रक्षा करने की प्रेरणा देते हैं-1-आध्यात्मिक,2-आधिदैविक,3-आधिभौतिक।
    जनेऊ के ये तीन धागे 1-माता,2-पिता,3- गुरु का ऋण उतारने के भी प्रेरक थे।
    रक्षा सूत्र अर्थात जनेऊ के ये तीन धागे ही 1-अविद्या,2-अन्याय,3-आभाव दूर करने की भी प्रेरणा देते हैं।
    लघु शंका आदि के समय कान पर इन धागों को लपेटने से 1-हार्ट,2-हार्निया,3-हाइड्रोसिल (एवं यूटरस) रोगों से भी सुरक्षा करते थे। आज पौराणिक पोंगा-पंथ के चलते इनकी वैज्ञानिकता समाप्त हो गई और यह ढोंग बन कर रह गया।
    'जनेऊ' संस्कार स्त्री-पुरुषों का समान रूप से होता था और यह प्रचलन 7 वी शताब्दी तक था जैसा कि 'बाण भट्ट' ने 'कादम्बरी'मे लिखा है "ब्रह्म्सूत्रेण पवित्रीकृतकायाम"। अर्थात महाश्वेता ने जनेऊ पहन रखा है।

    पौराणिक पोंगापंथ को धर्म मानने वालों के कारण एक वैज्ञानिक आधार पर 'रक्षा' का पर्व मौज-मस्ती-और अब कारोबारी पर्व बन गया है। कोई समझने और मानने को तैयार नहीं है रोने को सभी तैयार हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  11. रक्षा बंधन पर्व की बेहतरीन प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  12. सुंदर गीत...
    रक्षाबंधन की सादर बधाइयाँ...

    उत्तर देंहटाएं
  13. सुंदर गीत
    पर फोटो ज्यादा
    सुंदर है !!

    उत्तर देंहटाएं
  14. जितनी ममता होती है, माता की मृदु लोरी में,
    उससे भी ज्यादा ममता है, राखी की डोरी में,
    भरा हुआ कच्चे धागों में, भाई-बहन का प्यार।

    बहुत सुंदर भावमयी पंक्तियाँ ...
    शुभकामनाएँ !
    सादर !

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails