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शनिवार, 18 अगस्त 2012

"जीवन के चित्र" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


जीवन !
दो चक्र
कभी सरल
कभी वक्र,
--
जीवन !
दो रूप
कभी छाँव
कभी धूप
--
जीवन!
दो रुख
कभी सुख
कभी दुःख
--
जीवन !
दो चक्र
कभी सरल
कभी वक्र,
--
जीवन !
दो रूप
कभी छाँव
कभी धूप
--
जीवन!
दो रुख
कभी सुख
कभी दुःख
--
जीवन !
दो खेल
कभी जुदाई
कभी मेल
--
जीवन !
दो ढंग
कभी दोस्ती
कभी जंग
--
जीवन !
दो आस
कभी तम
कभी प्रकाश
--
जीवन !
दो सार
कभी नफरत
कभी प्यार

19 टिप्‍पणियां:

  1. वाह कितनी सहजता से जीवन को परिभाषित कर दिया।

    उत्तर देंहटाएं
  2. जीवन एक राज ,
    कभी (कोई)कबूतर ,कभी (कोई )बाज़ ,

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बेहतरीन जीवन को परिभाषित
    करती रचना......
    उत्तम .....
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  4. जीवन के विविध रूपों का सुंदर चित्रण

    उत्तर देंहटाएं
  5. जीवन के कई रंग है न जाने कितने रूप
    एकरूप जीवन मरण,कभी छाँव कभी धुप,,,,

    बहुत बढ़िया प्रस्तुति,,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  6. जीवन को सहजता से परिभाषित करती रचना......

    उत्तर देंहटाएं
  7. आज शामको इसे पढ़ा था। अभी एक बार फिर पढ़ रहा हूँ। बहुत ही बढ़िया तरीके से अपने अपनी बात कहीं है। मेरी दृष्टि में यह कविता का सुन्दर प्रतिदर्श है। बधाई आपको बौत - बहुत।

    क्षणिका
    एक क्षण
    कभी स्मरण
    कभी विस्मरण

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत ही सुंदर चित्र खींचे हैं आपने। बधाई।

    लगे हाथ आपको बता दूं कि ब्‍लॉगर्स के नाम महामहिम राज्‍यपाल जी का संदेश आया है। क्‍या पढ़ा आपने?

    उत्तर देंहटाएं
  9. जीवन को देखा, समझा और खूब समझाया।

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह बहुत सुन्दर....
    सीधी सरल रचना...काश के ऐसा ही होता जीवन भी.....
    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  11. जीवन का सार ! बहुत अच्छा लगा जीवन के अनेक रूप पढ़ना।

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत बढ़िया प्रस्तुति,,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  13. जीवन के विभिन्न रूपों का इतना सुन्दर वर्णन चित्र भी मन मुग्ध कर गया हार्दिक बधाई आपको

    उत्तर देंहटाएं

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