"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शुक्रवार, 17 अगस्त 2012

"प्रश्नजाल-भारत की दुर्दशा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


कहाँ खो गई मीठी-मीठी इन्सानों की बोली।
किसने नदियों की धारा में विष की बूटी घोली।।

कहाँ गयीं मधुरस में भीगी निश्छल वो मुस्कानें,
कहाँ गये वो देशप्रेम से सिंचित मधुर तराने,
किसकी कारा में बन्दी है सोनचिरैया भोली।
किसने नदियों की धारा में विष की बूटी घोली।।

लुप्त कहाँ हो गया वेद की श्रुतियों का उद्-गाता,
कहाँ खो गया गुरू-शिष्य का प्यारा-पावन नाता,
ढोंगी-भगत लिए फिरते क्यों चिमटा-डण्डा-झोली।
किसने नदियों की धारा में विष की बूटी घोली।।

मक्कारों को दूध-मलाई मिलता घेवर-फेना,
भूखे मरते हैं सन्यासी, मिलता नहीं चबेना,
सत्याग्रह पर बरसाई जाती क्यों लाठी-गोली।
किसने नदियों की धारा में विष की बूटी घोली।।

लोकतन्त्र में राजतन्त्र की क्यों फैली है छाया,
पाँच साल में जननायक ने कैसे द्रव्य कमाया,
धरती की बेटी की क्यों है फटी घाघरा-चोली।
किसने नदियों की धारा में विष की बूटी घोली।।

11 टिप्‍पणियां:

  1. लोकतन्त्र में राजतन्त्र की क्यों फैली है छाया,
    पाँच साल में जननायक ने कैसे द्रव्य कमाया,
    धरती की बेटी की क्यों है फटी घाघरा-चोली।
    किसने नदियों की धारा में विष की बूटी घोली।।
    ...sateek chitran

    उत्तर देंहटाएं
  2. लोकतन्त्र में राजतन्त्र की क्यों फैली है छाया,
    पाँच साल में जननायक ने कैसे द्रव्य कमाया,
    धरती की बेटी की क्यों है फटी घाघरा-चोली।
    किसने नदियों की धारा में विष की बूटी घोली।।

    ....कटु लेकिन सटीक अभिव्यक्ति। आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. कर्ता-धर्ता एक पार्टी, वही पुरानी टोली |
    जिसके घर पर सदा सजी है गिन्नी रंग रँगोली |
    ठगा हमेशा जिसने भारत, जनता सीधी भोली |
    जिसने खाई खूब सेवैयाँ, कभी न खेली होली |
    आज इकठ्ठा हुवे उसी के, सखा सखी हमजोली |
    आओ उनका तिलक करें हम, लेते आओ रोली ||

    उत्तर देंहटाएं
  4. मक्कारों को दूध-मलाई मिलता घेवर-फेना,
    भूखे मरते हैं सन्यासी, मिलता नहीं चबेना,
    सत्याग्रह पर बरसाई जाती क्यों लाठी-गोली।
    किसने नदियों की धारा में विष की बूटी घोली।।

    लोकतन्त्र में राजतन्त्र की क्यों फैली है छाया,
    पाँच साल में जननायक ने कैसे द्रव्य कमाया,
    धरती की बेटी की क्यों है फटी घाघरा-चोली।
    किसने नदियों की धारा में विष की बूटी घोली।।
    भारत दुर्दशा का सटीक चित्रण -एक मनहूस चेहरा देखो ,वो बैठी चर्च की बेटी ,भारत की करती रहती नित हेटी ...बहुत दर्द और कराह ,यथार्थ और आज का विद्रूप कथित उदारीकरण का "टाट" और "ठाठ " लिए है रचना ....धरती की बेटी की क्यों है फटी घाघरा चोली ...
    कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai
    शुक्रवार, 17 अगस्त 2012
    गर्भावस्था में काइरोप्रेक्टिक चेक अप क्यों ?

    उत्तर देंहटाएं
  5. सारी वादी उदास बैठी है...
    मौसम-ए-गुल ने खुदकशी कर ली...
    किसने बारूद बोया बागों में....

    उत्तर देंहटाएं
  6. खरगोश का संगीत राग रागेश्री पर आधारित है जो कि खमाज थाट का सांध्यकालीन
    राग है, स्वरों में कोमल निशाद
    और बाकी स्वर शुद्ध लगते हैं, पंचम
    इसमें वर्जित है, पर हमने इसमें अंत में
    पंचम का प्रयोग भी किया है, जिससे इसमें राग बागेश्री
    भी झलकता है...

    हमारी फिल्म का संगीत वेद नायेर ने दिया है.
    .. वेद जी को अपने संगीत कि प्रेरणा जंगल में
    चिड़ियों कि चहचाहट से मिलती है.
    ..
    My page :: खरगोश

    उत्तर देंहटाएं
  7. मक्कारों को दूध-मलाई मिलता घेवर-फेना,
    भूखे मरते हैं सन्यासी, मिलता नहीं चबेना
    व्यवस्था पर गहरा कटाक्ष।

    उत्तर देंहटाएं
  8. उचित प्रश्नजाल है....मगर अफ़सोस कोई गिद्ध नहीं फँसेगा... :(
    ~सादर !!!

    उत्तर देंहटाएं
  9. किसने नदिया जल में है विषधारा घोली ?

    सबको पता है पर बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे ?

    सटीक, सुंदर और सामयिक

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails