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रविवार, 5 अगस्त 2012

"छाया देने वाले ही तो, कहलाए जाते हैं छाते" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

धूप और बारिश से,
जो हमको हैं सदा बचाते।
छाया देने वाले ही तो,
कहलाए जाते हैं छाते।।
आसमान में जब घन छाते,
तब ये हाथों में हैं आते।
रंग-बिरंगे छाते ही तो,
हम बच्चों के मन को भाते।।
तभी अचानक आसमान से,
मोटी-मोटी बूँदें आई।
प्रांजल ने उतार खूँटी से,
छतरी खोली और लगाई।।
प्राची ने जैसे ही देखा,
भइया छतरी ले आया है।
उसने भी प्यारा सा छाता,
अपने सिर पर फैलाया है।।
कई दिनों में वर्षा आई,
जाग गई मन में उमंग हैं।
भाई-बहन दोनों ही खुश हैं,
दो छातों के अलग रंग हैं।।

15 टिप्‍पणियां:

  1. छाते की महत्ता बताती सुंदर सी बाल कविता !
    सादर !

    उत्तर देंहटाएं
  2. रंग बिरंगे छाते सी रंग बिखेरती रचना..!:-)
    सादर !!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 06-08-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-963 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  4. तकरीबन एक हफ्ते बाहर होने व अति व्यस्तता के कारन आभासी दुनिया से लगभग कटा रहा , सुन्दर दैनिक कृतियों से रूबरू नहीं हो सका .....माफ़ी चाहते हैं सर ! मित्रता दिवस की शुभ कामनाएं ......खुबसूरत बाल रचना, आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह ... कमाल की बाल रचना ... छाते के अनोखे रंग और निराले ढंग ...

    उत्तर देंहटाएं
  6. भारी बारिश और धुप में , छाता सदा सुहाता
    खुद बारिश में भीग कर,औरों को सदा बचाता,,,,,

    RECENT POST...: जिन्दगी,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह ये रंगीन छाते वाली कविता भा घई मन को ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. लेकिन यहां तो बरसात ही नहीं है। अब क्‍या करें? लेकिन आपने बहुत अच्‍छी कविता बनायी है।

    उत्तर देंहटाएं
  9. सहज ढंग से लिखी गयी बाल कविता , अच्छी लगी.

    उत्तर देंहटाएं
  10. अनुपम भाव लिये बेहतरीन प्रस्‍तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  11. ram ram bhai
    सोमवार, 6 अगस्त 2012
    भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

    उत्तर देंहटाएं

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