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शुक्रवार, 24 अगस्त 2012

"मैं भी गाऊँगा गीत नया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


अब छेड़ो कोई नया राग,
अब गाओ कोई गीत नया।
सुलगाओ कोई नयी आग,
लाओ कोई संगीत नया।

टूटी सी पतवार निशानी रह जायेगी,
दरिया की मानिन्द जवानी बह जायेगी,
फागुन में खेलो नया फाग,
अब गाओ कोई गीत नया।

पीछे-पीछे आओ, समय अच्छा आयेगा,
सोया स्वप्न-सलोना, सच्चा हो जायेगा,
करवट बदलेगा नया भाग,
अब गाओ कोई गीत नया।

मंजिल चल कर पास स्वयं ही आ जायेगी,
आशाओं की किरण, नयन में छा जायेंगी,
बालो चन्दा जैसा चिराग,
अब गाओ कोई गीत नया।

माँ मुझपर कृपादृष्टि कर दो,
उर में कुछ शब्दवृष्टि कर दो,
मेरा भी जाये भाग्य जाग,
मैं भी गाऊँगा गीत नया।
अब गाओ कोई गीत नया।।

21 टिप्‍पणियां:

  1. क्या कहने

    अब छेड़ो कोई नया राग,
    अब गाओ कोई गीत नया।
    सुलगाओ कोई नयी आग,
    लाओ कोई संगीत नया।

    बहुत सुंदर, क्या कहने

    उत्तर देंहटाएं
  2. माँ मुझपर कृपादृष्टि कर दो,
    उर में कुछ शब्दवृष्टि कर दो,
    मेरा भी जाये भाग्य जाग,
    मैं भी गाऊँगा गीत नया।,,,,,,

    लाजबाब पंक्तियाँ,,,
    शास्त्री जी,,,,लखनऊ में मिलते है,,,

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर,प्रेरणात्मक रचना शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर और मनभावन प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  5. हर गीत के साथ एक नया गीत बनता है

    उत्तर देंहटाएं
  6. माँ मुझपर कृपादृष्टि कर दो,
    उर में कुछ शब्दवृष्टि कर दो,
    मेरा भी जाये भाग्य जाग,
    मैं भी गाऊँगा गीत नया।
    अब गाओ कोई गीत नया।। आप पर तो सरस्वती का वर्ड हस्त है शब्द चेरे चेरियाँ बन पीछे पीछे चले आतें हैं भावानुरूप .कृपया यहाँ भी पधारें -
    गृधसी नाड़ी और टांगों का दर्द (Sciatica & Leg Pain)
    गृधसी नाड़ी और टांगों का दर्द (Sciatica & Leg Pain)

    सुष्मना ,पिंगला और इड़ा हमारे शरीर की तीन प्रधान नाड़ियाँ है लेकिन नसों का एक पूरा नेटवर्क है हमारी काया में इनमें से सबसे लम्बी नस को हम नाड़ी कहने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहें हैं .यही सबसे लम्बी और बड़ी (दीर्घतमा ) नस (नाड़ी )है :गृधसी या सियाटिका .हमारी कमर के निचले भाग में पांच छोटी छोटी नसों के संधि स्थल से इसका आगाज़ होता है और इसका अंजाम पैर के अगूंठों पर जाके होता है .यानी नितम्ब के,हिप्स के , जहां जोड़ हैं वहां से चलती है यह और वाया हमारे श्रोणी क्षेत्र (Pelvis),जांघ (जंघा ) के पिछले हिस्से ,से होते हुए घुटनों पिंडलियों से होती अगूंठों तक जाती है यह अकेली नस ,तंत्रिका या नाड़ी(माफ़ कीजिए इसे नाड़ी कहने की छूट आपसे ले चुका हूँ ).

    उत्तर देंहटाएं
  7. बालो चन्दा जैसा चिराग,
    अब गाओ कोई गीत नया।बहुत सुन्दर प्रयोग .सांगीतिकता लिए भावपूर्ण गीत ..कृपया यहाँ भी पधारें -
    शनिवार, 25 अगस्त 2012
    आखिरकार सियाटिका से भी राहत मिल जाती है .घबराइये नहीं .
    गृधसी नाड़ी और टांगों का दर्द (Sciatica & Leg Pain)एक सम्पूर्ण आलेख अब हिंदी में भी परिवर्धित रूप लिए .....http://veerubhai1947.blogspot.com/2012/08/blog-post_25.html

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर पंक्तियां
    मन को छू जाती हैं
    नया गीत गाये कोई
    सुनने को उकसाती हैं !

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत खूब,,,,प्रेरणात्मक सुंदर पंक्तियां.. |

    उत्तर देंहटाएं
  11. खरगोश का संगीत राग रागेश्री पर आधारित है
    जो कि खमाज थाट का सांध्यकालीन राग है, स्वरों में कोमल निशाद और बाकी स्वर शुद्ध
    लगते हैं, पंचम इसमें वर्जित है, पर हमने इसमें
    अंत में पंचम का प्रयोग भी किया है, जिससे इसमें राग बागेश्री भी झलकता है.
    ..

    हमारी फिल्म का संगीत वेद नायेर ने दिया है.
    .. वेद जी को अपने संगीत कि प्रेरणा
    जंगल में चिड़ियों कि चहचाहट से
    मिलती है...
    My homepage ... फिल्म

    उत्तर देंहटाएं

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