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गुरुवार, 31 जनवरी 2013

“महकी हवाएँ” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)


सुलगते प्यार में, महकी हवाएँ आने वाली हैं।
दिल-ए-बीमार को, देने दवाएँ आने वाली हैं।।

चटककर खिल गईं कलियाँ,
महक से भर गईं गलियाँ,
सुमन की सूनी घाटी में, सदाएँ आने वाली है।
दिल-ए-बीमार को, देने दवाएँ आने वाली हैं।।

चहकने लग गई कोयल,
सुहाने हो गये हैं पल,
नवेली कोपलों में, अब अदाएँ आने वाली हैं।
दिल-ए-बीमार को, देने दवाएँ आने वाली हैं।।

जवानी गीत है अनुपम,
भरे इसमें हजारों खम,
सुधा रसधार बरसाने, घटाएँ आने वाली हैं।
दिल-ए-बीमार को, देने दवाएँ आने वाली हैं।।

दिवस है प्यार करने का,
नही इज़हार करने का,
करोगे इश्क सच्चा तो, दुआएँ आने वाली हैं।
दिल-ए-बीमार को, देने दवाएँ आने वाली हैं।।

22 टिप्‍पणियां:

  1. वसंत के आने की आहट मिलने लगी है..सुंदर चित्र, भावपूर्ण कविता..

    उत्तर देंहटाएं
  2. हम भी ठंडी हवाओं की प्रतीक्षा मे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बसंत की दस्तक का एहसास दिलाती रचना ...
    ~सादर !!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. ग़मों को एक ही झटके में काफी दूर करती हैं....
    यहाँ आने को हर एक पंक्तियाँ मजबूर करती हैं...

    आदरणीय सर इतनी सुन्दरता के साथ लिखा है कि पढ़कर तरोताजा हो गया हूँ. जितनी दफा पढ़ता हूँ उतना ही आनंद और खुशबू आती है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  5. .सुंदर एहसास ,भावपूर्ण रचना**** दिवस है प्यार करने का,
    नही इज़हार करने का,
    करोगे इश्क सच्चा तो, दुआएँ आने वाली हैं।
    दिल-ए-बीमार को, देने दवाएँ आने वाली हैं।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति

    आभार सहित

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  7. करोगे इश्क सच्चा तो, दुआएँ आने वाली हैं...... बहुत ही सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत ही खुबसूरत ख्यालो से रची रचना......

    उत्तर देंहटाएं
  9. बसंत का स्वागत सुन्दर शब्दों से हो रहा है, वाह, आनन्दमय।

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुन्दर भावों से सजी रचना

    उत्तर देंहटाएं
  11. एक तरोताज़ा रचना के लि‍ए धन्‍यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत बढ़िया . यही तो जीवन का बसंत है ..

    उत्तर देंहटाएं
  14. प्रेम दिवस का मौक़ा है -ख्श्बू बनके वह गुलाब देने वाली है .....

    उत्तर देंहटाएं

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