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शनिवार, 12 जनवरी 2013

"चिल्लाया है कौआ-बालकविता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

काफी समय पहले 
एक बाल कविता लिखी थी!
मेरे आग्रह पर इसे मेरी मुँहबोली भतीजी 
अर्चना चावजी ने बहुत मन से गाया था!
आप भी इस बाल कविता का रस लीजिए!

काले रंग का चतुर-चपल,
पंछी है सबसे न्यारा।
डाली पर बैठा कौओं का, 
जोड़ा कितना प्यारा।

नजर घुमाकर देख रहे ये,
कहाँ मिलेगा खाना।
जिसको खाकर कर्कश स्वर में,
छेड़ें राग पुराना।।

काँव-काँव का इनका गाना,
सबको नहीं सुहाता।
लेकिन बच्चों को कौओं का,
सुर है बहुत लुभाता।।

कोयलिया की कुहू-कुहू,
बच्चों को रास न आती।
कागा की प्यारी सी बोली, 
इनका मन बहलाती।।

देख इसे आँगन में,
शिशु ने बोला औआ-औआ।
खुश होकर के काँव-काँवकर,
चिल्लाया है कौआ।।

12 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति |
    बढ़िया विषय |


    शुभकामनायें आदरेया ||

    उत्तर देंहटाएं


  2. ✿♥❀♥❁•*¨✿❀❁•*¨✫♥
    ♥सादर वंदे मातरम् !♥
    ♥✫¨*•❁❀✿¨*•❁♥❀♥✿


    देख इसे आँगन में,
    शिशु ने बोला औआ-औआ
    खुश होकर के काँव-काँवकर,
    चिल्लाया है कौआ

    वाह वाह !

    बहुत सुंदर बाल-गीत लिखा आपने आदरणीय डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'जी !
    लाजवाब !!

    और अर्चना चावजी की सस्वर प्रस्तुति एकदम बालकोचित मनोभावों के अनुरूप ही है ... बहुत बहुत बधाई आपको भी !
    आप दोनों को एक श्रेष्ठ रचना के लिए साधुवाद !!

    हार्दिक मंगलकामनाएं …
    लोहड़ी एवं मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर !

    राजेन्द्र स्वर्णकार
    ✿◥◤✿✿◥◤✿◥◤✿✿◥◤✿◥◤✿✿◥◤✿◥◤✿✿◥◤✿

    उत्तर देंहटाएं
  3. अति सुंदर कृति
    ---
    नवीनतम प्रविष्टी: गुलाबी कोंपलें

    उत्तर देंहटाएं
  4. बाल मन की सहजता लिए बाल रंग में रंगी कविता .आभार .

    उत्तर देंहटाएं
  5. डॉ .साहेब आपकी जितनी प्रशंशा की जाये कम है ....शुक्रिया आभार सुनने में बहुत मधुर

    उत्तर देंहटाएं
  6. कौवा किसी के आने का संदेशा लाता है, सुन्दर गीत

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर बाल कविता...
    :-)

    उत्तर देंहटाएं

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