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बुधवार, 23 जनवरी 2013

"दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

विषय-वस्तु में सार हो, लेकिन हो लालित्य।
दुनिया को जो दे दिशा, वो ही है साहित्य।१।

तम को को हरने के लिए, आये धरा पे नित्य।
जग को बाँटे दे ऊर्जा, वो ही है आदित्य।२।

घर में औ' परिवार में, उज्ज्वल रहे चरित्र।
जो सुख-दुख को बाँटता, वो ही सच्चा मित्र।३।

अन्धों को मिलती जहाँ,  आकर स्वयं बटेर।
उजियारा ही हारता,  आता जब अंधेर।४।

जन-जन को जो दे दिशा, उसका नेता नाम।
अब तो कुनबे के लिए, नेता करते काम।५।

अनपढ़ शासक कर रहे, पढ़े-लिखे बेकार।
जो घोटालों को करें, उनको मिले पगार।६।

17 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अर्थपूर्ण दोहे ... शास्त्री सर !
    बहुत समय बाद आप हमारे ब्लॉग में आए...इसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद व आभार!:)
    आपको भी गणतंत्र दिवस की अग्रिम शुभकामनाएँ!
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत बढ़िया समसामयिक दोहे ,,,..

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी पोस्ट की चर्चा 24- 01- 2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. पहले दोहे के तीसरे चरण में शायद --- दे ----- शब्द छूट गया है

    उत्तर देंहटाएं
  5. भाई दिलबाग विर्क जी आपने ठीक कहा!
    टंकण करने में छूट गया था!
    अब ठीक कर दिया है!
    आभार!

    उत्तर देंहटाएं

  6. करता अपने देश को नित्य प्रति बदनाम ,

    शिंदे उसका नाम ,

    नेतागिरी काम ,,सदियों से बदनाम .

    उत्तर देंहटाएं
  7. बिलकुल सही -
    सभी दोहे जानदार |
    आभार गुरु जी --

    तम को हरने के लिए, आय धरा पे नित्य।
    जग को बाँटे ऊर्जा, वो ही है आदित्य।२।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. शानदार दोहे..वाकई अब तो कुनबे के लि‍ए ही नेता करते हैं काम..

      हटाएं

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