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रविवार, 20 जनवरी 2013

"शारदे माँ! तुम्हें कर रहा हूँ नमन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


शारदे माँ! तुम्हें कर रहा हूँ नमन।
आप आकर करो अब सुवासित चमन।।

घोर तम है भरा आज परिवेश में,
सभ्यता सो गई आज तो देश में,
हो रहा है सुरा का यहाँ आचमन।
आप आकर करो अब सुवासित चमन।।

दो सुमेधा मैं मेधा से अनजान हूँ,
माँगता ऐसे छन्दों का वरदान हूँ,
जिनसे आये हमारे वतन में अमन।
आप आकर करो अब सुवासित चमन।।

अर्चना-वन्दना आपकी कर रहा,
शीश चरणों में, मैं आपके धर रहा,
आपके दर्शनों के हैं प्यासे नयन।
आप आकर करो अब सुवासित चमन।।

मेरे कानों में वीणा बजा दीजिए,
कोरे पन्नों में अक्षर सजा दीजिए,
मेरे मन को बना दीजिएगा सुमन।
आप आकर करो अब सुवासित चमन।।

23 टिप्‍पणियां:

  1. एक नए संदर्भ और रूप में आपने इस आराधना को प्रस्तुत किया है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह!
    आपकी यह पोस्ट कल दिनांक 21-01-2013 के चर्चामंच पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  3. घोर तम है भरा आज परिवेश में,
    सभ्यता सो गई आज तो देश में,
    हो रहा है सुरा का यहाँ आचमन।
    आप आकर करो अब सुवासित चमन।।

    माँ...प्रार्थना स्वीकार हो....!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. घोर तम है भरा आज परिवेश में,
    सभ्यता सो गई आज तो देश में,
    हो रहा है सुरा का यहाँ आचमन।
    आप आकर करो अब सुवासित चमन।।

    माँ शारदे को नमन !

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही सुंदर भक्तिमय आराधना मां को नमन ....

    उत्तर देंहटाएं
  6. KOTISAH NAMA SUNDAR BHAV,UTTAM PRASTUTI, SADAR अर्चना-वन्दना आपकी कर रहा,
    शीश चरणों में, मैं आपके धर रहा,
    आपके दर्शनों के हैं प्यासे नयन।
    आप आकर करो अब सुवासित चमन।।

    मेरे कानों में वीणा बजा दीजिए,
    कोरे पन्नों में अक्षर सजा दीजिए,
    मेरे मन को बना दीजिएगा सुमन।
    आप आकर करो अब सुवासित चमन।।

    उत्तर देंहटाएं
  7. माता सबको बुद्धि दे,
    हर जन जन का त्रास |
    आभार गुरु जी -

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह !! बहुत सुंदर वंदना | माँ को मेरा भी नमन |

    उत्तर देंहटाएं
  9. सच्ची ज्योति ज्ञान से ही संभव है. सुंदर रचना शास्त्री जी.

    उत्तर देंहटाएं
  10. घोर तम है भरा आज परिवेश में,
    सभ्यता सो गई आज तो देश में,
    हो रहा है सुरा का यहाँ आचमन।
    आप आकर करो अब सुवासित चमन।।

    नैतिक पतन को रोकने के लिये यह प्रार्थना अति आवश्यक है...

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर रचना, विद्या का अधिकार, दे शारदे माँ..

    उत्तर देंहटाएं
  12. घोर तम है भरा आज परिवेश में,
    सभ्यता सो गई आज तो देश में,
    हो रहा है सुरा का यहाँ आचमन ...

    सुन्दर आह्वान ... माँ शारदे के चरणों में ....
    लाजवाब ...

    उत्तर देंहटाएं
  13. माँ शारदे की सुंदर आराधना....
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  14. माँ वीणावादिनी की सुन्दर स्तुति । आपको भी नमन ।

    उत्तर देंहटाएं

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