"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

बुधवार, 30 जनवरी 2013

"दो मुक्तक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


(१)
नेह का नीर पिलाकर देखो।
शोख कलियों को खिला कर देखो।
वेवजहा हाथ मिलाने से कुछ नहीं होगा-
दिल से  दिल को तो मिलाकर देखो।।
"शास्त्री मयंक"

(1)
NEH KAA NEER PILAAKAR DEKHO.
SHOKH KALION KO KHILAAKAR DEKHO.
BEVJAHA HAATH MILANE SE KUCHH NAHI HOGAA-
DIL SE DIL KO TO MILAAKAR DEKHO....
"SHASTRI MAYANK"
--
(2)

अब तो हर बात बहुत दूर गई।
दिल की सौगात बहुत दूर गई।
रौशनी अब नज़र नहीं आती
चाँदनी रात बहुत दूर गई।।
"शास्त्री मयंक"
--
(2)

AB TO HAR BAAT BAHUT DOOR GAYEE.
DIL KEE SAUGAAT BAHUT DOOR GAYEE.
RAUSHANI AB NAZAR NAHI AATEE-
CHAANDNI RAAT BAHUT DOOR GAYEE..
"SHASTRI MAYANK"

21 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर मुक्तक --उम्मीदों का दामन फिर भी थामे रखना है

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही सुंदर मुक्तक -आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी पोस्ट 31 - 01- 2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें ।
    --

    उत्तर देंहटाएं
  4. मुक्त हस्त से गढ़ रहे, मुक्तक गुरुवर आज |
    नेह रोशनी का मिलन, पढ़ता चले समाज ||

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत ही सुंदर ,****** नेह का नीर पिलाकर देखो।
    शोख कलियों को खिला कर देखो।
    वेवजहा हाथ मिलाने से कुछ नहीं होगा-
    दिल से दिल को तो मिलाकर देखो।।*********************************** अब तो हर बात बहुत दूर गई।
    दिल की सौगात बहुत दूर गई।
    रौशनी अब नज़र नहीं आती
    चाँदनी रात बहुत दूर गई।।

    उत्तर देंहटाएं
  7. दोनों ही मुक्तक काफी सुन्दर ,,,
    दिलों का मिलना जरुरी है
    सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपके द्वारा पोस्ट किए गए दोनों मुक्तक ही बहुत सुन्दर है। सादर आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  9. मनमोहक अंदाज़ लिए हैं दोनों मुक्तक .

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह! क्या बात है ई हिंदी अंग्रेजी दोनों में वाह वाह

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. हिन्दी तो है लेकिन अंग्रेजी नहीं , यह रोमन लिपि में हिन्दी है।

      हटाएं
  11. आपकी कविताओं की रोशनी भी बड़ी दूर तक है.

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत अच्छा सर और सच है ये

    उत्तर देंहटाएं
  13. दोनों रचनाएँ बहुत अच्छी लगी, शुभकामनाएँ.

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  15. दिल की सौगात बहुत दूर गई।
    चाँदनी रात बहुत दूर गई।।
    बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails