"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

रविवार, 13 जनवरी 2013

"दोहा-चार चरण-दो पंक्तियाँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 
तेरह-ग्यारह से बना, दोहा छन्द प्रसिद्ध।
सरस्वती की कृपा से, करलो इसको सिद्ध।१।

चार चरण-दो पंक्तियाँ, करती गहरी मार।
कह देती संक्षेप में, जीवन का सब सार।२।

सरल-तरल इस छन्द में, बहते गहरे भाव।
दोहे में ही निहित है, नैसर्गिक अनुभाव।३।

तुलसीदास-कबीर ने, दोहे किये पसन्द।
दोहे के आगे सभी, फीके लगते छन्द।४।

दोहा सज्जनवृन्द के, जीवन का आधार।
दोहों में ही रम रहा, सन्तों का संसार।५।

12 टिप्‍पणियां:

  1. दोहे के सुखरस के आगे बाकी सब फीके है,दोहों को पढने में जो आनन्द है वो और कहाँ।बेहतरीन शब्दों में सुन्दर दोहे।आपका बहुत आभार शास्त्री जी।

    उत्तर देंहटाएं
  2. दोहे के माध्यम से दोहे की विशेषता -अति सुंदर
    New post: कुछ पता नहीं !!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. तुलसीदास-कबीर ने, दोहे किये पसन्द।
    दोहे के आगे सभी, फीके लगते छन्द
    बहुत सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं
  4. एकदम सही बात कही गयी है। वास्तव में पढने में सहज सरल "दोहा" ही है। बहुत ही सुन्दर ढंग से इसके गुर शामिल है आपके दोहों में ......आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत बढ़िया दोहावली |
    आभार ||

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह वाह बहुत सुन्दर और सारगर्भित दोहे

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति सोमवार के चर्चा मंच पर ।। मंगल मंगल मकरसंक्रांति ।।

    उत्तर देंहटाएं
  8. दोहे सरल और अच्छे |मकर संक्रांति पर शुभ कामनाएं आपको सपरिवार |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  9. सर जी मछली जब कांटे में आ जाती है तब वह पानी में ही होती है .कांटे से मुक्त होने के लिए वह मचलती ज़रूर है लेकिन जहां तक पीड़ा का सवाल है निरपेक्ष बनी रहती है मौन सिंह की तरह

    .मछली के

    पास प्राणमय कोष और अन्न मय कोष तो है ,मनो मय कोष नहीं है .पीड़ा केंद्र नहीं हैं .हलचल तो है चेतना नहीं है दर्द का एहसास नहीं है .शुक्रिया ज़नाब की टिपण्णी के लिए .


    मंगल मय हो संक्रांति पर्व .देश भी संक्रमण की स्थिति में है .सरकार की हर स्तर पर नालायकी ने देश को इकठ्ठा कर दिया है .शुक्रिया आपकी सद्य टिपण्णी का .

    दोहे पे दोहे ,सब तोकू टोहे

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails