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बुधवार, 30 जनवरी 2013

"छाया चारों ओर उजाला" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


धूप धरा पर आज खिली है,
छाया चारों ओर उजाला।
उपवन में गुंजन करता है,
भँवरा हो करके मतवाला।।

छटा निराली है गुलशन की,
कली चहकती-फूल महकता,
सेमल हुआ लाल अंगारा,
यौवन उसका खूब दहकता,
महाकुम्भ में संगम तट पर,
योगी फेर रहे हैं माला।
उपवन में गुंजन करता है,
भँवरा हो करके मतवाला।।

कोंपल फूट रहीं पेड़ों में.
खेतों में हरियाली छाई,
अब बसन्त ने दस्तक ही है,
सर्दी भागी-गर्मी आई,
कीट-पतंगों को खाने को,
मकड़ी बुनती जाती जाला।
उपवन में गुंजन करता है,
भँवरा हो करके मतवाला।।

ऊँचे छज्जों पर मधुमक्खी,
छत्ते को हर साल बनाती,
दिनभर फूलों पर मँडराकर,
शहद इकट्ठा करती जाती,
नहीं जानती उसके धन पर,
कब है डाका पड़ने वाला।
उपवन में गुंजन करता है,
भँवरा हो करके मतवाला।।

हिमगिरि की ऊँची चोटी से,
जल बन करके हिम पिघला है,
प्यासी नदियों को भरने को,
पर्वत से धारा निकला है,
कलकल-छलछल बहती गंगा,
जैसे चलती अल्हड़ बाला।
उपवन में गुंजन करता है,
भँवरा हो करके मतवाला।।

तीन पात के पेड़ों पर भी,
लाल-लाल टेसू निखरे हैं,
ओस चमकती ऐसी जैसे,
पत्तों पर मोती बिखरे हैं,
अब आया मधुमास सुहाना,
निर्बल को बल देने वाला।
उपवन में गुंजन करता है,
भँवरा हो करके मतवाला।।

8 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय सर प्रणाम, भीनी-भीनी खुशबू फैलाती हृदय में है बसते जाती. बहुत ही सुन्दर कविता है ह्रदय में विद्यमान हो गई, हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. अरे वाह चारो और फैला उजाला ..
    वर्तमान की ऐँसी स्थिती तो नही हैँ आगे जाकर हो या ना हो ...
    सुंदर सरल भावबोधक कविता ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. जाला यह षड्यंत्र का, अंधियारे का जाल |
    जला जमाना जलजला, दुष्ट ठोकते ताल |
    दुष्ट ठोकते ताल, ज़माना है मुट्ठी में |
    सदा जमाना रंग, पिया माँ की घुट्टी में |
    चेतो सज्जन वृन्द, करो मिल वार कराला |
    काटे रविकर तमस, धरा पर होय उजाला ||

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही मनमोहक कविता,पढ़ते समय लगता है की उपवन में सैर कर रहें हों,अतिसुन्दर आपका आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  6. मनमोहक प्रस्तुति,बहुत ही सुन्दर रचना********^^^^^^^********************* अब आया मधुमास सुहाना,
    निर्बल को बल देने वाला।
    उपवन में गुंजन करता है,
    भँवरा हो करके मतवाला।।

    उत्तर देंहटाएं

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