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बुधवार, 16 जनवरी 2013

“लोचन रोता है” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 जब आता है दुःख तभी,
सागर सा लोचन रोता है।
आँसू का अस्तित्व,
नहीं सागर से कम होता है।।

हार नही मानी जिसने,
बहती नदियों-नहरों से,
जल को लिया समेट स्वयं,
गिरती-उठती लहरों से,
रत्न वही पाता है जो,
मंथक सक्षम होता है। 

आँसू का अस्तित्व,
नहीं सागर से कम होता है।।  


जो फूलों के संग काँटों को,
सहन किये जाता है,
जो अमृत के साथ गरल का,
घूँट पिये जाता है,
शीत, ग्रीष्म और वर्षा में,
वो नहीं असम होता है। 

आँसू का अस्तित्व,
नहीं सागर से कम होता है।।

22 टिप्‍पणियां:

  1. sundar bhavo se susajit prastuti,जो फूलों के संग काँटों को,
    सहन किये जाता है,
    जो अमृत के साथ गरल का,
    घूँट पिये जाता है,
    शीत, ग्रीष्म और वर्षा में,
    वो नहीं असम होता है।
    आँसू का अस्तित्व,
    नहीं सागर से कम होता है।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. जो अमृत के साथ गरल का,
    घूँट पिये जाता है,
    शीत, ग्रीष्म और वर्षा में,
    वो नहीं असम होता है।


    जो ऐसा कर पाते हैं उन्हें ही सच्चा आनंद मिल पाता है. सुन्दर रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया |
    आभार गुरूजी ||

    उत्तर देंहटाएं
  4. रत्न वही पाता है जो,
    मंथक सक्षम होता है।
    आँसू का अस्तित्व,
    नहीं सागर से कम होता है।।
    बहुत बढ़िया !

    उत्तर देंहटाएं
  5. जब आता है दुःख तभी,
    सागर सा लोचन रोता है।
    आँसू का अस्तित्व,
    नहीं सागर से कम होता

    बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुती,आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत उम्दा,भावपूर्ण प्रस्तुति,,,आभार

    उत्तर देंहटाएं
  7. जो फूलों के संग काँटों को,
    सहन किये जाता है,
    जो अमृत के साथ गरल का,
    घूँट पिये जाता है,..

    जीवन को ऐसे ही लोग जी पाते हैं ... कुछ नाम कर जाते हैं ...
    बहुत ही लाजवाब पंक्तियाँ ... नमस्कार शास्त्री जी ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. सागर की गहराई और दुख की गहराई, दोनों ही खारे..

    उत्तर देंहटाएं
  9. सम की स्थिति बहुत विषम है.
    कविता आपकी इसमें सक्षम है.

    उत्तर देंहटाएं
  10. आंसूं की कथा व्यथा कहती सुंदर कविता..

    उत्तर देंहटाएं
  11. वाह बहुत ही भाव प्रवण रचना

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपकी इस पोस्ट की चर्चा 17-01-2013 के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें और अपने बहुमूल्य विचारों से अवगत करवाएं

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत अच्छी !! गहरे एहसास ..

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत ही भावपूर्ण रचना

    दुःख सुख दोनों अश्रु संग संग

    सहज प्रवाहित होता है, वाकई

    आंसू का अस्तित्व नहीं सागर से

    कम होता है ......आदरणीय की

    भावपूर्ण रचना के लिए आभार ....!

    उत्तर देंहटाएं
  15. उत्कृष्ट प्रस्तुति -आंसू का अस्तित्व नहीं सागर से कम होता है

    उत्तर देंहटाएं
  16. आदरनीय मयंक जी बहुत ही सुन्दर कविता |आभार

    उत्तर देंहटाएं
  17. सागर जितना भरा हुआ हो
    उतना सागर बन रोता है!

    उत्तर देंहटाएं
  18. शानदार प्रस्तुति हमारी आँखों में ही सागर होता है जो कभी गम में कभी ख़ुशी में छलकता है बहुत बहुत बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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