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रविवार, 27 जनवरी 2013

"हमारा चमन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जी रहे पेड़-पौधे हमारे लिए
दे रहे हैं हमें शुद्ध-शीतल पवन! 
खिल उठा है इन्हीं से हमारा चमन!! 

आदमी के सितम-जुल्म को सह रहे
परकटे से शज़र निज कथा कह रहे
रत्न अनमोल हैं ये हमारे लिए
कर रहे हम इन्हीं का हमेशा दमन! 
खिल उठा है इन्हीं से हमारा चमन!! 

ये हमारे लिए मुफ्त उपहार हैं
कर रहे देश-दुनिया पे उपकार हैं
ये बचाते धरा को हमारे लिए
रोग और शोक का होता इनसे शमन! 
खिल उठा है इन्हीं से हमारा चमन!! 

ये हमारी प्रदूषित हवा पी रहे
घोटकर हम इन्हीं को दवा पी रहे
तन हवन कर रहे ये हमारे लिए
इनके तप-त्याग को है हमारा नमन!
खिल उठा है इन्हीं से हमारा चमन!! 

18 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय सर प्रणाम, सार्थक सोंच आज हमारे देश में प्रयावरण के साथ हो रहे अत्याचार का सुन्दर वर्णन किया है, इस ओर ध्यान दिलाने हेतु अनेक-अनेक धन्यवाद बहुत ही सुन्दर रचना मन भा गई, हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. पर्यावरण के प्रति सचेत करती सुन्दर कविता

    उत्तर देंहटाएं
  3. ये हमारी प्रदूषित हवा पी रहे,
    घोटकर हम इन्हीं को दवा पी रहे,
    तन हवन कर रहे ये हमारे लिए,
    इनके तप-त्याग को है हमारा नमन!
    खिल उठा है इन्हीं से हमारा चमन!!

    वनस्पति प्रेम को समर्पित सुन्दर रचना .

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बढ़िया आदरणीय |
    शुद्ध हवा हितकर दवा, पादप के उपहार |
    मानव जीवन लालची, हरपल रहा सँहार ||

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. शुद्ध हवा हितकर दवा, पादप के उपहार |
      मानव जीवन लालची, हरपल रहा सँहार |
      हरपल रहा सँहार, वार पर वार किये है |
      काट रहा जो डाल, पैर वह वहीँ दिए है |
      रे नादाँ इंसान, चेताये तुझको रविकर |
      कर पौधों से प्यार, हवा होती है हितकर |।

      हटाएं
  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. यदि प्रकृति के साथ यह दोहन नहीं रोका तो भारत में कयामत से पहले ही कयामत हो जायेगी.

    उत्तर देंहटाएं
  7. इनके तप-त्याग को है हमारा नमन!
    खिल उठा है इन्हीं से हमारा चमन!!

    उम्दा प्रस्तुति !!

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह!
    आपकी यह प्रविष्टि को आज दिनांक 28-01-2013 को चर्चामंच-1138 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  9. अनन्त उपकार हैं इस प्रकृति के हम पर इंसान
    मानता कहाँ है!

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  10. पर्यावरण के दोहन पर सुंदर प्रस्तुती,इसका खामियजा तो हम सब भुगत ही रहे है।

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  11. पर्यावरण के लिए आपके ऐसे विचारों को पढ़कर बहुत अच्छा लगा |

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

    उत्तर देंहटाएं
  12. ये हमारी प्रदूषित हवा पी रहे,
    घोटकर हम इन्हीं को दवा पी रहे,
    तन हवन कर रहे ये हमारे लिए,
    इनके तप-त्याग को है हमारा नमन!
    खिल उठा है इन्हीं से हमारा चमन!!

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं

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