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शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

"सुहाना लगता है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


सबको अपना आज सुहाना लगता है। 
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

उडने को  आकाश पड़ा है,
पुष्पक भी तो पास खड़ा है
पंछी को परवाज सुहाना लगता है।
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

राजनीति की सनक चढी है,
लोलुपता की  ललक बढ़ी है,
काँटों का भी ताज सुहाना लगता है। 
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

गेहूँ पर आ गई बालियाँ,
हरे रंग में रंगी डालियाँ,
ऋतुओं में ऋतुराज सुहाना लगता है।
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

गुञ्जन करना और इठलाना,
भीना-भीना राग सुनाना,
मलयानिल का साज सुहाना लगता है।
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

तन-मन ने ली है अँगड़ाई,
कञ्चन सी काया गदराई,
होली का आगाज सुहाना लगता है।
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।। 

टेसू दहका अंगारा सा,
आशिक बहका आवारा सा,
बासन्ती अन्दाज सुहाना लगता है।
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

23 टिप्‍पणियां:

  1. अपने-आप में ही खोई-खोई सी रचना...- अच्छी लगी शास्त्री सर!
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. गेहूँ पर आ गई बालियाँ,
    हरे रंग में रंगी डालियाँ,
    ऋतुओं में ऋतुराज सुहाना लगता है।
    छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।
    बहुत सुन्दर!

    उत्तर देंहटाएं
  3. गुरुवर रचते रहे हैं, तरह तरह के गीत |
    आज मूड कुछ अलग है, लगे सुहाना मीत |

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  5. प्रकृति के हर रंग और रूप को शब्दों में ढाल दिया और एक सुन्दर रचना रच गयी . और आपकी कलम तो रोज एक रचना रचती है . आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  6. उत्कृष्ट प्रस्तुति , भावनात्मक अभिव्यक्ति, सुन्दर कलम सुन्दर रचना*****^^^^^^*** राजनीति की सनक चढी है,
    लोलुपता की ललक बढ़ी है,
    काँटों का भी ताज सुहाना लगता है।
    छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत बढ़िया प्रस्तुति शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  8. हमको आपका यह अन्दाज सुहाना लगता है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. रोज रोज अच्छी कवितायें
    भाषा भाव की नई छटायें
    अभिव्यक्ति का यह अंदाज सुहाना लगता है।

    उत्तर देंहटाएं
  10. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (2-2-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  11. उडने को आकाश पड़ा है,
    पुष्पक भी तो पास खड़ा है,
    पंछी को परवाज सुहाना लगता है।
    छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

    वाह ...क्या बात है..

    उत्तर देंहटाएं
  12. वातावरण प्रधान सुन्दर गीत ,

    उड़ने (उड़ने )को ,उड़ने को ...आकाश सुहाना लगता है ,

    कल का वो संगीत सुहाना लगता है .

    Virendra Sharma ‏@Veerubhai1947
    असली उल्लू कौन ? http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2013/02/blog-post_5036.html …
    Expand

    Virendra Sharma ‏@Veerubhai1947
    ram ram bhai मुखपृष्ठ शनिवार, 2 फरवरी 2013 Mystery of owls spinning their heads all the way around revealed http://veerubhai1947.blogspot.in/
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