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शनिवार, 19 जनवरी 2013

"भजन-दुनियादारी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


चार दिनों का ही मेला है, सारी दुनियादारी।
लेकिन नहीं जानता कोई, कब आयेगी बारी।।

अमर समझता है अपने को, दुनिया का हर प्राणी,
छल-फरेब के बोल, बोलती रहती सबकी वाणी,
बिना मुहूरत निकल जायेगी इक दिन प्राणसवारी।
लेकिन नहीं जानता कोई, कब आयेगी बारी।।

ठाठ-बाट और महल-दुमहले, साथ न तेरे जायेंगे,
केवल मरघट तक ही सारे, रस्म निभाने आयेंगे,
जिन्दा लोगों से सब रखते, अपनी नातेदारी।
लेकिन नहीं जानता कोई, कब आयेगी बारी।।

काम-क्रोध, मद-लोभ सभीकुछ, जीते-जी की माया,
धू-धू करके जल जायेगी, इक दिन तेरी काया,
आने के ही साथ बँधी है, जाने की तैयारी।
लेकिन नहीं जानता कोई, कब आयेगी बारी।।

याद करे तुझको दुनिया, तू ऐसा पुण्य कमाता जा,
मरने से पहले ऐ प्राणी, सच्चा पथ अपनाता जा,
जीवन का अवसान हो रहा, सिमट रही है पारी।
लेकिन नहीं जानता कोई, कब आयेगी बारी।।

17 टिप्‍पणियां:

  1. शाश्वत सत्य जीवन का वैराग्य माया मोह सभी कुछ समेटे है यह रचना .शुक्रिया हमें चर्चा मंच पे बनाए रखने के लिए .

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस चार दिन की दुनियादारी में किये हुए अच्छे पुण्य कर्म ही श्मशान के बाद भी साथ निभाते है।बहुत ही सुन्दर प्यार भजन।

    उत्तर देंहटाएं
  3. याद करे तुझको दुनिया, तू ऐसा पुण्य कमाता जा,
    मरने से पहले ऐ प्राणी, सच्चा पथ अपनाता जा,
    जीवन का अवसान हो रहा, सिमट रही है पारी।
    लेकिन नहीं जानता कोई, कब आयेगी बारी।।

    यही है आदर्श जीवन दर्शन..आभार इन सुंदर पंक्तियों के लिए..

    उत्तर देंहटाएं
  4. प्रभावी प्रस्तुति ।।

    आभार ।।

    उत्तर देंहटाएं
  5. लोग इतना ही ध्यान कर लें तो दुनिया के झगड़े यूं ही मिट जायें.

    उत्तर देंहटाएं
  6. काम-क्रोध, मद-लोभ सभीकुछ, जीते-जी की माया,
    धू-धू करके जल जायेगी, इक दिन तेरी काया,
    आने के ही साथ बँधी है, जाने की तैयारी।
    लेकिन नहीं जानता कोई, कब आयेगी बारी।।

    यही है शाश्वत सत्य …………एक सुन्दर संदेश देती बेहतरीन रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  7. अन्त सभी को जाना लेकिन जीवन पूर्ण निभाना है।

    उत्तर देंहटाएं
  8. आने के ही साथ विदा की होते देखी तैयारी ,

    खत्म लगी होने खुलते ही मेरी जीवन मधुशाला .

    बढ़िया प्रस्तुति कबीर दर्शन लिए है .आभार आपकी द्रुत टिपण्णी का .

    ram ram bhai
    मुखपृष्ठ

    शनिवार, 19 जनवरी 2013
    कहीं आप युवा कांग्रेस की राहुल सेना तो नहीं ?

    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  9. याद करे तुझको दुनिया, तू ऐसा पुण्य कमाता जा,
    मरने से पहले ऐ प्राणी, सच्चा पथ अपनाता जा,
    जीवन का अवसान हो रहा, सिमट रही है पारी।
    लेकिन नहीं जानता कोई, कब आयेगी बारी।।

    बहुत शानदार, सार्थक सन्देश देती रचना,,,, शास्त्री जी बधाई स्वीकारे,,,

    recent post : बस्तर-बाला,,,

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह! वाह! वाह! वाह! बहुत सुन्दर ह्रदय को छु गयी पंक्तियाँ
    आने के साथ बंधी है जाने की तैय्यारी ..
    बहुत खूब !
    याद करे तुझको दुनिया, तू ऐसा पुण्य कमाता जा,
    मरने से पहले ऐ प्राणी, सच्चा पथ अपनाता जा,
    जीवन का अवसान हो रहा, सिमट रही है पारी।
    लेकिन नहीं जानता कोई, कब आयेगी बारी।।
    कौन समझता है आने के बाद जाना भी है ..
    अधिकतर तो यही मानते हैं की वो 'अमर ' हैं ....

    उत्तर देंहटाएं
  11. यथार्थ संदेश दिया है आपने। लेकिन वाह-वाह करने वाले भी अमल नहीं करेंगे। उनका अपना अहंकार आड़े आ जाएगा। थोड़ा धन या थोड़ी अक्ल ज़्यादा पाकर वे लोग खुद को खुदा समझते हैं।
    बात की बात कि बेबात की फिक्र ---विजय राजबली माथुर

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  12. बहुत उम्दा भजन -जीवन का सार आपने बता दिया ....... कुछ बोलना नहीं सिर्फ महसूस करना है.
    New post : शहीद की मज़ार से
    New post कुछ पता नहीं !!! (द्वितीय भाग )

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुन्दर सार्थक सन्देश देती प्रस्तुति***^^^***याद करे तुझको दुनिया, तू ऐसा पुण्य कमाता जा,
    मरने से पहले ऐ प्राणी, सच्चा पथ अपनाता जा,
    जीवन का अवसान हो रहा, सिमट रही है पारी।
    लेकिन नहीं जानता कोई, कब आयेगी बारी।।

    उत्तर देंहटाएं
  14. सब जानते हैं मगर लगे रहते हैं दुनि‍यादारी में...सत्‍यबोध कराती प्रभावी रचना

    उत्तर देंहटाएं

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