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बुधवार, 24 अप्रैल 2013

"मेरा घर है सबसे प्यारा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


सुन्दर-सुन्दर सबसे न्यारा।
मेरा घर है सबसे प्यारा।।

खुला-खुला सा नील गगन है।
हरा-भरा फैला आँगन है।।

पेड़ों की छाया सुखदायी।
सूरज ने किरणें चमकाई।।

कल-कल का है नाद सुनाती।
निर्मल नदिया बहती जाती।।

तन-मन खुशियों से भर जाता।
यहाँ प्रदूषण नहीं सताता।।

लोग पुराने यह कहते हैं।
 कच्चे घर अच्छे रहते हैं।।

19 टिप्‍पणियां:

  1. सच में अब तो ऐसा घर स्वप्न बन कर रहा गया है...बहुत सुन्दर बालगीत...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर बाल कविता शास्त्री जी ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर बाल रचना के साथ सुन्दर पेंटिंग !!
    आभार आदरणीय !!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर बाल कविता शास्त्री जी ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. अपने घर की बात ही और होती है. धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  6. hamara ghar kitana pyara kitana nyara ... bahut badhiya baal geet hai ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपकी यह प्रस्तुति कल के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें

    उत्तर देंहटाएं
  8. खुला-खुला सा नील गगन है।
    हरा-भरा फैला आँगन है।।-------

    आपने घर की एक नयी सार्थक परिभाषा प्रस्तुत की है
    वाकई जीवन का सच यही है
    प्रणाम आपको

    उत्तर देंहटाएं
  9. सच में ऐसा घर स्वप्न हो गया है....आपने घर की एक नयी व सार्थक परिभाषा प्रस्तुत की है।

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुंदर बाल कविता और प्यारा सा चित्र ....

    उत्तर देंहटाएं
  11. कच्‍चे घर अच्‍छे लगते हैं, बहुत खूबसूरत।

    उत्तर देंहटाएं
  12. खुबसूरत सपनों का घर
    ऐसे घर अब कहाँ ?

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत ही सुंदर बाल कविता,सादर आभार.

    उत्तर देंहटाएं

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