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सोमवार, 8 अप्रैल 2013

"भारत की नारी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

उनकी और उनके बच्चों की बातें,
चुप होकर सह लेती है।
सब के दर्द को,
अपने दिल में दबा कर,
रख लेती है।

वह एक माँ है,
अच्छी पत्नी भी है
वह भारत की नारी है।
परिवार की हर वस्तु,
उसे प्यारी है।

सबकी जली-कटी,
झेलती है,
और बदले में,
पतली-पतली,
रोटियाँ भी बेलती है।

इसने माँ-बहन और
बेटी का दर्जा पाया है,
यातनाएँ सह कर भी,
सब पर प्यार ही लुटाया है।

नारी प्यार की
परछाई कहलाती है।
इसीलिए तो
अत्याचार सहती जाती है।

कितनी सदियाँ गुज़र गयी,
लेकिन नहीं बदली
नारियों की किस्मत।
अब भी रोज ही,
लुटती है महिलाओं की अस्मत।

संविधान में बदलाव की बातें,
कर्णधारों के चोंचले,
आज भी
सारे दावे हैं 
थोथे और खोखले!

18 टिप्‍पणियां:

  1. नारी की व्यथा को उकेरती सुंदर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  2. सही कहा आपने -इनकी सब बाते झूठे हैं दिखावा है -सुंदर रचना
    LATEST POSTसपना और तुम

    उत्तर देंहटाएं
  3. नारी के लिए तो जन्म लेने से मृत्यु तक इसी सफर को तय करना होता है।लेकिन आखिर कब तक?नारी भले ही कितनी ही पढ़ लिख जाए। थोड़े समय के लिए समाज का नजरिया उसके प्रति बदल भी जाएँ तब भी आज भी वह अत्याचारों के कैदखाने में बंद ही है। बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति नारी की व्यथा को दर्शाती हुई,धन्य है आपकी लेखनी.

    उत्तर देंहटाएं
  4. कोन कोन मैं कलस बने भगवन एक ना पाए ।
    जब मन देखा आपनै प्रियतम रूप मुसुकाए ॥

    भावार्थ : --
    कोने कोने में मंदिर निर्मित है किन्तु भगवान् एक में भी नहीं मिले ।
    जब अपना ह्रदय देखा तो प्रियतम स्वरूप में भगवान मुस्कराते हुवे मिले ॥

    उत्तर देंहटाएं
  5. नारी कि सही दशा बताती हुई रचना

    उत्तर देंहटाएं
  6. बढ़िया अभिव्यक्ति-
    आभार आदरणीय-

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 10/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 9/4/13 को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां स्वागत है ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत बेहतरीन सुंदर चित्रण !!! आज के नारी के दशा का,,,

    RECENT POST: जुल्म

    उत्तर देंहटाएं
  10. संविधान में बदलाव की बातें,
    कर्णधारों के चोंचले,
    आज भी
    सारे दावे हैं
    थोथे और खोखले!

    bilkul satik chitran kiya hai

    उत्तर देंहटाएं
  11. आदरणीय गुरुदेव श्री सादर नारी की महिमा का सुन्दर चित्रण किया है आपने इस हेतु ढेरों बधाई स्वीकारें.

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत अच्छी रचना...
    सादर नमन..

    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  13. नारी व्यथा को बाखूबी लिखा है ...
    सब कुछ हो के भी नारी को सहना पड़ता है ...

    उत्तर देंहटाएं
  14. हर क्षेत्र में स्वयं को स्थापित करती भारतीय नारी।

    उत्तर देंहटाएं

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