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बुधवार, 3 अप्रैल 2013

"सुलगाओ फिर से नयी आग" (डा.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


अब छेड़ो कोई नया राग, अब गाओ कोई गीत नया।
सुलगाओ फिर से नयी आग, लाओ कोई संगीत नया।

टूटी सी पतवार निशानी रह जायेगी,
दरिया की मानिन्द जवानी बह जायेगी,
फागुन में खेलो नया फाग, अब गाओ कोई गीत नया।
सुलगाओ फिर से नयी आग, लाओ कोई संगीत नया।

सुख-दुख का है चक्र, समय अच्छा आयेगा,
इक दिन स्वप्न-सलोना, सच्चा हो जायेगा,
करवट बदलेगा नया भाग, अब गाओ कोई गीत नया।
सुलगाओ फिर से नयी आग, लाओ कोई संगीत नया।

मंजिल चल कर पास स्वयं ही आ जायेगी,
आशा की नवकिरण, नयन में छा जायेगी,
बालो चन्दा जैसा चिराग, अब गाओ कोई गीत नया।
सुलगाओ फिर से नयी आग, लाओ कोई संगीत नया।

12 टिप्‍पणियां:

  1. शुभकामनायें-
    सुन्दर प्रस्तुति -

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेहतरीन संदेश देती सुन्दर प्रेरक रचना,आभार आदरणीय.

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुंदर बोध देती पंक्तियाँ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. बारो चंदा जैसा चिराग ...
    नवीन बिम्ब शीतल चांदनी को चिराग की रौशनी से जोड़ता है !
    बहुत बढ़िया !

    उत्तर देंहटाएं
  5. आशावादी भाव सकारात्मक सोच बढ़िया संदेश युक्त गीत हेतु हार्दिक बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुख-दुख का है चक्र, समय अच्छा आयेगा,
    इक दिन स्वप्न-सलोना, सच्चा हो जायेगा,
    करवट बदलेगा नया भाग, अब गाओ कोई गीत नया।
    सुलगाओ फिर से नयी आग, लाओ कोई संगीत नया।……………बहुत ही प्रेरक गीत

    उत्तर देंहटाएं
  7. ऊर्जा को पुकारता गीत, बहुत सुन्दर।

    उत्तर देंहटाएं

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