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मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

"बूढ़ा बरगद जिन्दा है..." (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


अभी गाँव के देवालय में बूढ़ा बरगद जिन्दा है।
करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।।

बाबू-अफसर-नेता करते, खुलेआम रिश्वतखोरी,
जिनका खाते माल, उन्हीं से करते हैं सीनाजोरी,
मक्कारी के जालों में, उलझा मासूम परिन्दा है।
करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।।

माँ-बहनों की लज्जा लुटती, गलियों में-बाजारों में,
गुण्डागर्दी करने वाले, शामिल हैं सरकारों में,
लालन-पालन करने वाला, परेशान कारिन्दा है।
करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।।

लोकतन्त्र में शासन करने के, सब ही अधिकारी हैं,
कुटुम-कबीलों की इसमे, क्यों होती भागीदारी हैं,
कब छोड़ोगे सिंहासन को कहता हर बाशिन्दा है।
करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।।

ओछी गगरी घनी छलकती, भरी हुई चुपचाप रहे,
जिसकी दाढ़ी में तिनका है, वही ज्ञान की बात कहे,
घोटाले करने वाला ही, करता चुगली-निन्दा है।
करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।।

25 टिप्‍पणियां:

  1. अपनी करतूतों में डूबे, कल को कितना भूल गये हम।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आज के संदर्भ की क्लासिक रचना
    बहुत सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  3. अभी गाँव के देवालय में बूढ़ा बरगद जिन्दा है।
    करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।।

    Wah-wah, Sab kuch ye do laayine kah gai.

    उत्तर देंहटाएं
  4. सारगर्भित रचना ....अर्थपूर्ण पंक्तियाँ .

    उत्तर देंहटाएं
  5. ak kadvi sachhayee ko vya kari behatareen prastuti,माँ-बहनों की लज्जा लुटती, गलियों में-बाजारों में,
    गुण्डागर्दी करने वाले, शामिल हैं सरकारों में,
    लालन-पालन करने वाला, परेशान कारिन्दा है।
    करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।।

    लोकतन्त्र में शासन करने के, सब ही अधिकारी हैं,
    कुटुम-कबीलों की इसमे, क्यों होती भागीदारी हैं,
    कब छोड़ोगे सिंहासन को कहता हर बाशिन्दा है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. आज का सच देखकर .. सच में शर्मिंदा होगा.. :(
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. आज कि हकीकत को बयाँ करती सटीक रचना !!

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार (17-04-2013) के "साहित्य दर्पण " (चर्चा मंच-1210) पर भी होगी! आपके अनमोल विचार दीजिये , मंच पर आपकी प्रतीक्षा है .
    सूचनार्थ...सादर!

    उत्तर देंहटाएं
  9. .एक एक बात सही कही है आपने .भावात्मक अभिव्यक्ति ह्रदय को छू गयी आभार नवसंवत्सर की बहुत बहुत शुभकामनायें दादा साहेब फाल्के और भारत रत्न :राजनीतिक हस्तक्षेप बंद हो . .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MANजाने संविधान में कैसे है संपत्ति का अधिकार-1

    उत्तर देंहटाएं
  10. कब छोड़ोगे सिंहासन को कहता हर बाशिन्दा है?
    सबके मन में यह प्रश्न है .

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  11. बहुत बेवाक विचार रखती रचना |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  12. वर्तमान सन्दर्भों में आज के तंत्र की बेबाकी से बखिया उधेड़ती एक सशक्त रचना ! बहुत खूब !

    उत्तर देंहटाएं
  13. सुंदर एवं भावपूर्ण रचना...

    आप की ये रचना 19-04-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।

    उत्तर देंहटाएं
  14. आज के परिवेश के अनुसार सटीक रचना | आभार

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

    उत्तर देंहटाएं
  15. सुन्दर प्रस्तुति ||
    आभार गुरुवर -

    उत्तर देंहटाएं

  16. गहरी संवेदनाओं से प्रसूत है यह रचना .

    उत्तर देंहटाएं
  17. भोगवाद की भेंट चढ़ते हमारे संस्‍कारों पर आंख खोलने वाली रचना है।

    उत्तर देंहटाएं
  18. माँ-बहनों की लज्जा लुटती, गलियों में-बाजारों में,
    गुण्डागर्दी करने वाले, शामिल हैं सरकारों में,

    बहुत सुन्दर....बेहतरीन प्रस्तुति
    पधारें बेटियाँ ...

    उत्तर देंहटाएं

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