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गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

"दीप अब कैसे जलेगा...?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

रौशनी का सिलसिला कैसे चलेगा?
आँधियों में दीप अब कैसे जलेगा?

कामनाओं का प्रबल सैलाब जब बहने लगा,
भावनाओं का सबल आलाप ये कहने लगा,
नेह का बिरुआ यहाँ कैसे पलेगा?
आँधियों में दीप अब कैसे जलेगा?

लोच है जिनके बदन में, वो सभी रह जायेंगे,
जो तने-अकड़े हुए हैं, वो सभी ढह जायेंगे,
आचरण-व्यवहार अब कैसे फलेगा?
आँधियों में दीप अब कैसे जलेगा?

आँधियों का दौर है, क्यों खेलते हो आग से,
मन-बदन शीतल बनाना, फाल्गुन की फाग से,
रंग के बिन दिवस अब कैसे ढलेगा?
आँधियों में दीप अब कैसे जलेगा

19 टिप्‍पणियां:

  1. इस आँधियों के दौर में भी दीप तो जलाना ही पडेगा,बहुत ही सशक्त रचना,आभार आदरणीय.

    उत्तर देंहटाएं
  2. लोच है जिनके बदन में, वो सभी रह जायेंगे,
    जो तने-अकड़े हुए हैं, वो सभी ढह जायेंगे,
    आचरण-व्यवहार अब कैसे फलेगा?
    आँधियों में दीप अब कैसे जलेगा?………………सुन्दर संदेश देती अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  3. दीप को तो जलाना ही पडेगा..…सुन्दर संदेश देती सशक्त रचना ,,आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. लोच है जिनके बदन में, वो सभी रह जायेंगे,
    जो तने-अकड़े हुए हैं, वो सभी ढह जायेंगे,...

    सच कहा है ... झुकने से टूटने से बच जाते हैं ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. vicharniy prastuti, kaise ?ka gambhir prashn khada karti sundar prastuti

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  7. सत्य सटीक एवं सुन्दर आदरणीय गुरुदेव श्री बेहद सुन्दर हार्दिक बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  8. लोच है जिनके बदन में, वो सभी रह जायेंगे,
    जो तने-अकड़े हुए हैं, वो सभी ढह जायेंगे,
    आचरण-व्यवहार अब कैसे फलेगा?
    आँधियों में दीप अब कैसे जलेगा?
    ......सबसे सुन्दर पंक्तियाँ .....सुन्दर गीत...

    उत्तर देंहटाएं
  9. जो झुकेंगे वो बच जायेंगे ,जो तन कर खड़े रहेंगे वो टूटेंगे
    latest post सुहाने सपने

    उत्तर देंहटाएं
  10. लोच है जिनके बदन में, वो सभी रह जायेंगे,
    जो तने-अकड़े हुए हैं, वो सभी ढह जायेंगे,.. क्या बात कही है शास्त्री जी ,, बहुत खूब!

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  11. दीप अगर बुझ गया तो अंधकार और गहरा जाएगा और आंधियों में कौन कहां पहुंच जाएगा कहा नहीं जा सकता।
    बहुत सुन्दर गुरूदेव!
    इतनी सुन्दर रचना के लिए आपका आभार!

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  12. सुन्दर शानदार प्रस्तुति हेतु बधाई आपको

    उत्तर देंहटाएं
  13. आपकी रचना निर्झर टाइम्स पर लिंक की गयी है। कृपया इसे देखें http://nirjhar-times.blogspot.com और अपने सुझाव दें।

    उत्तर देंहटाएं
  14. आचरण में रिक्तता है, चिन्ता सामयिक है।

    उत्तर देंहटाएं

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