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शनिवार, 6 अप्रैल 2013

"ग़ज़ल-राहगीरों से प्यार मत करना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


ज़िन्दग़ी तार-तार मत करना
कोई वादा-क़रार मत करना

भावनाओं के जोश में आकर
राहगीरों से प्यार मत करना

ज़लज़ले नाख़ुदा नहीं होते
ज़ालिमों से पुकार मत करना

अपने दिल की सफेद चादर को
बेवज़ह दाग़दार मत करना

अपना दामन बचाना फूलों से
“रूप” का ऐतबार मत करना 

25 टिप्‍पणियां:

  1. वाह...
    बहुत सुन्दर ग़ज़ल....
    सरल और सहज भाव....

    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर गुरूदेव! आपकी कलम का कोई सानी नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. भावनाओं के जोश में आकर
    राहगीरों से प्यार मत करना
    सुंदर ग़ज़ल !

    उत्तर देंहटाएं

  4. पानी की धारा सी स्वच्छंद बहती खुबसूरत गजल !
    LATEST POST सुहाने सपने
    my post कोल्हू के बैल

    उत्तर देंहटाएं
  5. अपने दिल की सफेद चादर को
    बेवज़ह दाग़दार मत करना ,,,,
    बहुत बेहतरीन सुंदर गजल !
    RECENT POST: जुल्म

    उत्तर देंहटाएं
  6. परदेसियों से न अखियाँ मिलाना ...?
    वाह!

    उत्तर देंहटाएं
  7. बेहतरीन सीख देती सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति,आभार आदरणीय.

    उत्तर देंहटाएं
  8. बेह्तरीन ग़ज़ल है, सर जी. मुबारक हो !

    उत्तर देंहटाएं
  9. इस गज़लिका में कोमल भावना में 'यथार्थ ' को बड़े कायदे से पिरोया गया है !!

    उत्तर देंहटाएं
  10. अपना दामन बचाना फूलों से
    “रूप” का ऐतबार मत करना

    बहुत सुन्दर है ,बहुत खूब है .

    उत्तर देंहटाएं
  11. सुन्दर नीति-वाक्य. जो मानेगा ,सुखी रहेगा!

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार (07-04-2013) के चर्चा मंच 1207 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  13. भावनाओं के जोश में आकर
    राहगीरों से प्यार मत करना....waah.....saare hi acche hain....

    उत्तर देंहटाएं
  14. अपना दामन बचाना फूलों से
    “रूप” का ऐतबार मत करना

    उत्तर देंहटाएं
  15. बढ़िया गजल सभी अशआर अर्थपूर्ण सावधान करते हुए माया मोह से .काया मोह से .

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत सहजता से कही गई गहरी बात ..बहुत खूब शास्त्री जी!

    उत्तर देंहटाएं
  17. नमन करता हूं मैं आप की अदभुत लेखनी को

    सुंदर एवं भावपूर्ण रचना...

    आप की ये रचना 12-04-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।

    उत्तर देंहटाएं

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