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मंगलवार, 30 अप्रैल 2013

"फोटोफीचर-कुमुद" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

नन्हे सुमन से
एक रचना (फोटोफीचर)

आप कभी धोखा मत खाना!
कमल नहीं इनको बतलाना!!
शाम ढली तो ये ऐसे थे।
दोनों बन्द कली जैसे थे।।
जैसे-जैसे हुआ अंधेरा।
खुलता गया कली का चेहरा।।
बढ़ती रही सरल मुस्काने।
अदा अनोखी लगी दिखाने।।
 अब पंखुड़ियाँ थीं फैलाई।
देख कुमुदिनी थी शर्मायी।
दोनों ने जब नज़र मिलाई।
अपनी मोहक छवि दिखलाई।।
अन्धकार अब था गहराया।
कुमुद खुशी से था लहराया।।
एक रूप है एक रंग है!
कमल-कुमुद के भिन्न ढंग हैं।।
कमल हमेशा दिन में खिलता।
कुमुद रात में हँसता मिलता।।

16 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
    आप की ये रचना 03-05-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
      आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
      सूचनार्थ...सादर।

      हटाएं
  2. बहुत ही सुन्दर कविता,आभार.

    फूलों से मिलकर रहना सीखो,
    आपस में खुश रहन सीखो....
    फूल हैं ये कितने कोमल,
    सुंदर दिखते हैं ये हर पल....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बढिया रचना पहले भी पढी है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुंदर रचना ...साथ ही जाना की कमल और कुमुदनी में क्या अन्तेर है...
    धन्यवाद सर ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर कुमुदिनियो के फूल है

    उत्तर देंहटाएं
  6. दोनों में अंतर बताती बेहतरीन सुंदर प्रस्तुति ,,,आभार

    RECENT POST: मधुशाला,

    उत्तर देंहटाएं
  7. आयु के क्रमिक विकास को प्रकट करने वाली रचना|वात्सल्य में 'श्रृंगार' का समावेश कैसे -कब हो जाता है, पता ही नहीं चलता !रचना अच्छी है |

    उत्तर देंहटाएं
  8. बेहतरीन सुंदर प्रस्तुति ,,,आभार

    उत्तर देंहटाएं
  9. कोमलता का एहसास ...बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  10. बेहद खूब सूरत चित्रमय काव्य .आनंद वर्षन कर गया .

    उत्तर देंहटाएं
  11. कहां के चित्र हैं शास्त्री साहब., बहुत सुन्दर हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपने तो चित्त प्रसन्न कर दिया -आभार !

    उत्तर देंहटाएं

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