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गुरुवार, 25 अप्रैल 2013

" बेटी से भी प्यार करो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


माता का सम्मान करो,
जय माता की कहने वालो।
भूतकाल को याद करो,
नवयुग में रहने वालो।।

झाड़ और झंखाड़ हटाकर, राह बनाना सीखो,
ऊबड़-खाबड़ धरती में भी, फसल उगाना सीखो,
गंगा में स्नान करो,
कीचड़ में रहने वालो।
भूतकाल को याद करो,
नवयुग में रहने वालो।।

बेटों के जैसा ही, बेटी से भी प्यार करो ना,
नारी से नर पैदा होते, ये भी ध्यान धरो ना,
मत जीवन बरबाद करो,
दुनिया में रहने वालो।
भूतकाल को याद करो,
नवयुग में रहने वालो।।

दया-धर्म और क्षमा-सरलता, ही सच्चे गहने हैं,
दुर्गा-सरस्वती-लक्ष्मी ही, अपनी माता-बहनें हैं।
घर अपना आबाद करो,
पूजन-वन्दन करने वालो।
भूतकाल को याद करो,
नवयुग में रहने वालो।।

11 टिप्‍पणियां:

  1. आधे जन जब पीछे छूटें,
    कौन बढ़ा, किसको हम माने।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सन्देश देती सुन्दर रचना ....!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. हनुमान जयंती की वधाई !
    देश की दुर्द्क्षा पर खेद ! खेद !! खेद !!!
    अच्छा विचार है |
    बेटे ही तो नहीं बेटियाँ भी तो देश की ताक़त हैं |
    पक्षपात दोनों में करना, सब से बड़ी हिमाकात है ||

    उत्तर देंहटाएं
  4. अच्छा विचार है !
    बेटियाँ भी तो देश की ताक़त हैं |
    लोग फिर भेद की करते क्यों हिमाकात हैं ||

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर हुज़ूर | बधाई

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

    उत्तर देंहटाएं
  6. ये बेटियाँ ही शिव शक्तियां हैं बेहतरीन भाव अर्थ और राग लिए गीत .

    घर घर में होती है जिनकी पूजा ,चेतन में वो देवियाँ आ गईं ,

    शिव शक्तियां आ गईं .

    बन ज्ञान गंगा वो अमृत पिलाएं ,वो उमा बनके उमंग को बढ़ाएं ,

    वो सर्व की प्यास बुझा रही हैं .

    शिव शक्तियां आ गईं .


    वो दुर्गा बन दुर्गुणों को मिटाएं ,वो काली बन सब कर्मों को हटाएं ,

    वो संतोषी संतुष्ट बना रहीं हैं .

    शिव शक्तियां आ गईं ,धरती पे शिव शक्तियां आ गईं .

    वो लक्ष्मी बनकर ज्ञान धन को लुटाएं ,

    वो सरस्वती बन ,ज्ञान वीणा सुनाएं ,

    वरदानों को वर्षा रहीं हैं .

    शिव शक्तियां आ गईं .....

    उत्तर देंहटाएं

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