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गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

"ग़ज़ल-सलीके को बताता है..." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

रदीफों-काफ़ियों को, जो इशारों पर नचाता है
ग़ज़लग़ो ग़ज़ल लिखने के, सलीके को बताता है

देखकर जाम-ओ-मीना, फसल शेरों की उगती है
मिलाकर दाल-चावल शान से खिचड़ी पकाता है

रवायत का नहीं मुहताज़ होता है कोई जुम्ला
ज़िगर के खून से वो वजन, लब्ज़ों का बढ़ाता है 

महज़ तुकबन्दियों पर ही, नहीं होता फिदा कोई
 सधा अशआर ही माशूक के दिल को रिझाता है

लगी दिल की लगे जिससे, वही तो दिल्लग़ी होती
सुख़नवर “रूप” मक़्ते में हबीबों को दिखाता है

20 टिप्‍पणियां:

  1. वाह आदरणीय गुरुदेव वाह क्या बात छा गए आप लाजवाब प्रस्तुति हार्दिक बधाई स्वीकारें

    उत्तर देंहटाएं
  2. लाजवाब गजल के मायने बताती हुई गजल
    गुरु जी लाजवाब

    उत्तर देंहटाएं
  3. गुरूदेव यही तो आपकी विशेषता है कि रूप हबीबों को ही नहीं रकीबों को भी दिखा देते हैं।
    वाह! बहुत सुन्दर!

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 06/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेहतरीन अशआर हैं गजल के .कई शैर काबिले दाद हैं -

    लगी दिल की लगे जिससे, वही तो दिल्लग़ी होती
    सुख़नवर “रूप” मक़्ते में हबीबों को दिखाता है


    देखकर जाम-ओ-मीना, फसल शेरों की उगती है
    मिलाकर दाल-चावल शान से खिचड़ी पकाता है

    कृपया फसल "शैरों" की उगती है करें .

    महज़ तुकबन्दियों पर ही, नहीं होता फिदा होता कोई
    सधा अशआर ही माशूक के दिल को रिझाता है

    "नहीं होता फ़िदा कोई "करें ,होता दो बार चला आया है .

    गजल को फिर से लिखने के सलीके वो बताता है
    (दूसरी लाइन ये करके देखें )

    उत्तर देंहटाएं
  6. एक कलस काल कीलाल दुजन मैं भरे पंक ।
    दोनों के कर कल काल का राजा का रंक ॥

    भावार्थ : --
    एक कलश में मद्य भरी है, तो दुसरे में पाप भरा है ।
    संपन्न हो या सम्पन्न हीन इसके हाथो भविष्य में दोनों की ही मृत्यु संभव है ॥
    अर्थात : -- " कदाचरण कैसे भी क्यों न हो, अंत में मृत्यु का कारण बनाता है"

    उत्तर देंहटाएं
  7. 'रवायत का नहीं मुहताज़ होता है कोई जुम्ला
    ज़िगर के खून से वो वजन, लब्ज़ों का बढ़ाता है'
    -क्या खूब है!
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी यह लाजवाब रचना 'निर्झर टाइम्स' पर लिंक की जा रही है। http://nirjhar-times.blogspot पर आपका हार्दिक स्वागत है,कृपया अलोकन करें।आपका सुझाव सादर आमंत्रित है।

    उत्तर देंहटाएं
  9. महज़ तुकबन्दियों पर ही, नहीं होता फिदा कोई.
    - बिलकुल सच कहा है आपने-धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  10. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (6-4-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं

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