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सोमवार, 22 अप्रैल 2013

"दीमकों से चमन को कैसे बचायें?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


दीमकों से चमन को कैसे बचायें?
मोतियों की फसल को कैसे उगायें?

अन्न को घुन मुक्त होकर चर रहे हैं,
माल को परदेश में वो भर रहे हैं,
दरिन्दे बेखौफ हरकत कर रहे हैं,
बालिकाएँ और बालक डर रहे हैं,
हम बदन के कोढ़ को कैसे मिटायें?
मोतियों की फसल को कैसे उगायें?

कोयला-लक्कड़ व पत्थर खा रहे हैं,
मुल्क में गद्दार बढ़ते जा रहे हैं,
कुर्सियों पर बोझ बनकर छा रहे हैं,
सुख यहाँ काले फिरंगी पा रहे हैं,
अब सरोवर को विमल कैसे बनायें?
मोतियों की फसल को कैसे उगायें?

शाख अपनी धूल में हमने मिला दी,
खो चुकी है आज अपनी शान खादी,
कह रही हिन्दोस्ताँ की आज दादी, 
अब लुटेरों की बनी पहचान खादी,
चैन की वंशी यहाँ कैसे बजायें?
मोतियों की फसल को कैसे उगायें?

हम भुलाने में लगे हैं धर्म और ईमान को,
लूटने में हम लगे हैं राम-को रहमान को,
छोड़ बैठे आज हम परिवेश के परिधान को,
हो गया है आज क्या अच्छे-भले इन्सान को,
सभ्यता का पाठ अब कैसे पढ़ायें?
मोतियों की फसल को कैसे उगायें?

27 टिप्‍पणियां:

  1. दुनिया की हकीकत बयां करती सुन्दर कविता....

    उत्तर देंहटाएं
  2. हम भुलाने में लगे हैं धर्म और ईमान को,
    लूटने में हम लगे हैं राम-को रहमान को,nalatest post सजा कैसा हो ?
    latest post तुम अनन्त
    hut sundar

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय

    उत्तर देंहटाएं
  4. मुल्क में गद्दार बढ़ते जा रहे हैं,कुर्सियों पर बोझ बनकर छा रहे हैं,
    साथक रचना !!
    आभार आदरणीय !!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर रचना!

    बेख़ौफ़ दरिन्दे
    कुचलती मासूमियत
    शर्मशार इंसानियत
    सम्बेदन हीनता की पराकाष्टा .
    उग्र और बेचैन अभिभाबक
    एक प्रश्न चिन्ह ?
    हम सबके लिये.


    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल २३ /४/१३ को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां हार्दिक स्वागत है ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. सच बहुत मुश्किल हो गया है जीना इन हालात में

    उत्तर देंहटाएं
  8. वर्तमान सामाजिक और राजनैतिक परिदृश्य का भयावह चित्र ....
    बहुत सटीक,महोदय....

    उत्तर देंहटाएं
  9. सटीक और प्रहार करती रचना शास्त्री जी .........

    उत्तर देंहटाएं
  10. आज के हालात पे सही प्रहार करती रचना!

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  11. बहुत सुंदर रचना ... .सार्थकता को लिए हुए.

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत अच्छी....और सार्थक रचना.

    सादर
    अनु

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  13. नमन है आपकी लेखनी को. आज के भारत के आम आदमी की चिन्ता को शब्दों में बखूबी ढ़ाल दिया है.

    उत्तर देंहटाएं
  14. हम बदन के कोढ़ को कैसे मिटायें?
    मोतियों की फसल को कैसे उगायें?
    सटीक रचना .....
    शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  15. वर्तमान सामाजिक और राजनैतिक परिदृश्य पर प्रहार करती रचना, हम बदन के कोढ़ को कैसे मिटायें? मोतियों की फसल को कैसे उगायें?

    उत्तर देंहटाएं
  16. आज के राजनीतिक विद्रूप पर सटीक और सशक्त टिपण्णी है यह रचना ओज संसिक्त .

    उत्तर देंहटाएं
  17. सुन्दर विचारणीय प्रस्तुति जिम्मेदारी से न भाग-जाग जनता जाग" .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MANजाने संविधान में कैसे है संपत्ति का अधिकार-2

    उत्तर देंहटाएं
  18. दीमको को देख रहे हैं सब लोग
    खुद भी दीमक हो जा रहे हैं
    अच्छा है कुछ लोग तो हैं
    जो देश बचाने के लिये
    आगे आ रहे हैं
    बता रहे हैं सुझा रहे हैं
    दीमकों को दिखा रहे हैं !

    बहुत सुंदर !

    उत्तर देंहटाएं
  19. विचारणीय सार्थक रचना. आभार

    उत्तर देंहटाएं
  20. आज के वक्त के मुताबिक सटीक रचना

    उत्तर देंहटाएं
  21. सब खाया, अब दृष्टि हमारे खानपान पर।

    उत्तर देंहटाएं
  22. सभ्यता का पाठ अब कैसे पढ़ायें?

    उत्तर देंहटाएं

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