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बुधवार, 28 अप्रैल 2010

‘‘प्रश्न जाल’’ ‘‘चम्पू छन्द’’ (डा0 रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

कौन थे? क्या थे? कहाँ हम जा रहे?
व्योम में घश्याम क्यों छाया हुआ?
भूल कर तम में पुरातन डगर को,
कण्टकों में फँस गये असहाय हो,
वास करते थे कभी यहाँ पर करोड़ो देवता,
देवताओं के नगर का नाम आर्यावर्त था,
काल बदला, देव से मानव कहाये,
ठीक था, कुछ भी नही अवसाद था,
किन्तु अब मानव से दानव बन गये,
खो गयी जाने कहाँ? प्राचीनता,
मूल्य मानव के सभी तो मिट गये,
शारदा में पंक है आया हुआ,
हे प्रभो! इस आदमी को देख लो,
लिप्त है इसमे बहुत शैतानियत,
आज परिवर्तन हुआ कैसा घना,
हो गयी है लुप्त सब इन्सानियत।

16 टिप्‍पणियां:

  1. काल बदला, देव से मानव कहाये,
    ठीक था, कुछ भी नही अवसाद था,
    किन्तु अब मानव से दानव बन गये,
    खो गयी जाने कहाँ? प्राचीनता
    सच्चाई को आपने बखूबी शब्दों में पिरोया है! बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ! हमेशा की तरह एक बेहतरीन रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  2. शास्त्री जी सुंदर प्रस्तुति के लिए धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर और अच्छी प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  4. आज परिवर्तन हुआ कैसा घना,
    हो गयी है लुप्त सब इन्सानियत।
    सुन्दर
    बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही उत्तम रचना और वक्त की सच्चाई दिखाती हुई...

    उत्तर देंहटाएं
  6. हे प्रभो! इस आदमी को देख लो,
    लिप्त है इसमे बहुत शैतानियत,
    आज परिवर्तन हुआ कैसा घना,
    हो गयी है लुप्त सब इन्सानियत।

    बिल्‍कुल सही है !!

    उत्तर देंहटाएं
  7. इसी प्रश्न जाल मे तो इन्सान उलझा हुआ है………………बहुत सुन्दर्।

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह जि बहुत सुंदर भाव लिये है आप की यह रचना. धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.....


    चम्पू छंद की विशेषता बताएँ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान,
    कितना बदल गया इंसान।

    उत्तर देंहटाएं

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