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गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

“जीवन में प्यार!” (अनुवादक:डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

Life in a Love

A Poem by Robert Browning


अनुवादक: 
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक” 

भुला दो मुझे!
छोड़ दो मुझे!
..  ..  ..  ..  ..
मैं तुम्हें
कभी नही भुला पाउँगा!
जब तक
मैं! मैं हूँ
और तुम
तुम हो!
अमर रहेगा मेरा प्यार!
तब तक
जब तक
रक्खेगा हमें यह संसार!
मैं प्यार हूँ
और तुम विमुख
जिसकी यादों में समाए हैं
सुख और दुख
यादें तो मजबूरी हैं
जिन्दगी में
कितनी दूरी हैं
प्यार एक गलती है
जो सभी के जीवन में चलती है
ये भाग्य के समान है
कभी समान, कभी असमान है
मैं सबसे अच्छा करने पर
सफलता से डरता हूँ
और असफल होने पर
उफ भी नहीं करता हूँ
लेकिन तब होता है
तन्त्रिकाओं मे तनाव
शुष्क हँसी
और निराशा के भाव
मन कहता है उठो
जिन्दगी को  
फिर से पकड़ लो
प्यार को 
पाश में जकड़ लो
दूरियों की परवाह मत करो
धूल और अन्धेरों से
कभी मत डरो
जल्दी मत करो
मैंने

जो बून्द बोई है 
आशा की 
वह एक न एक दिन
नया आकार अवश्य लेगी
और खुद को
चिह्नित करेगी
हमेशा…….!!
Robert Browning 
(1812 - 1889)

Robert Browning

13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब शास्त्री जी, बड़े ही मोहक और सुन्दर लफ्जो में आपने अनुवाद प्रस्तुत किया !

    उत्तर देंहटाएं
  2. मैं सबसे अच्छा करने पर
    सफलता से डरता हूँ
    और असफल होने पर
    उफ भी नहीं करता

    लगता ही नहीं कि यह अनूदित कविता है , बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. ख़ूबसूरत और मनमोहक शब्दों से आपने रचना को सुसज्जित किया है! दिल को छू गयी!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत शानदार. निशब्द कर दिया. मनमोहक. अद्भुत.

    उत्तर देंहटाएं
  5. जिन्दगी को
    फिर से पकड़ लो
    प्यार को
    पाश में जकड़ लो
    दूरियों की परवाह मत करो

    बहुत खूबसूरत अनुवाद....बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपके अनुवाद की सहजता
    उसे अति महत्त्वपूर्ण बना देती है!

    उत्तर देंहटाएं
  7. जो बून्द बोई है
    आशा की
    वह एक न एक दिन
    नया आकार अवश्य लेगी
    आशा का यह निराकार आकार आशा के दीप जला रही है.
    बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह वाह …………बहुत ही शानदार अनुवाद किया है………………रचना पढ्कर भाव विभोर हो गयि हूँ।

    उत्तर देंहटाएं

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