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रविवार, 11 अप्रैल 2010

“दुश्मन से हम नही डरेंगे!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

अडिग रहे हैं, अडिग रहेंगे
सदा बढ़े हैं, सदा बढ़ेंगे!
हम तो दरिया का पानी है
रुककर हम तो नहीं सड़ेंगे!!

कितनों ने सन्देशे भेजे
कितनों से भिजवाये गये
कितनों ने आकर धमकाया
कितनों ने जमकर फुसलाया
हम भारत के हैं बाशिन्दे
पर्वत बन कर डटे रहेंगे!
हम तो दरिया का पानी है
रुककर हम तो नहीं सड़ेंगे!!

हममें गहराई सागर की
चाह नही हमको गागर की
काँटों पर हम चलने वाले
हम अपनी धुन के मतवाले
हम जमकर के लोहा लेंगे
दुश्मन से हम नही डरेंगे!
हम तो दरिया का पानी है
रुककर हम तो नहीं सड़ेंगे!!

5 टिप्‍पणियां:

  1. हममें गहराई सागर की
    चाह नही हमको गागर की
    काँटों पर हम चलने वाले
    हम अपनी धुन के मतवाले
    हम जमकर के लोहा लेंगे
    दुश्मन से हम नही डरेंगे!
    हम तो दरिया का पानी है
    रुककर हम तो नहीं सड़ेंगे!!

    bahut hi shnadar dil jeet liya

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. हममें गहराई सागर की
    चाह नही हमको गागर की
    काँटों पर हम चलने वाले
    हम अपनी धुन के मतवाले

    nice

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ख़ूबसूरत गीत लिखा है आपने! लाजवाब!

    उत्तर देंहटाएं

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