"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

गुरुवार, 22 अप्रैल 2010

" नमन शैतान करते है।" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

हमारा आवरण जिसने, सजाया और सँवारा है,
हसीं पर्यावरण जिसने, बनाया और निखारा है।
बहुत आभार है उसका, बहुत उपकार है उसका,
दिया माटी के पुतले को, उसी ने प्राण प्यारा है।।


बहाई ज्ञान की गंगा, मधुरता ईख में कर दी,
कभी गर्मी, कभी वर्षा, कभी कम्पन भरी सरदी।
किया है रात को रोशन, दिये हैं चाँद और तारे,
अमावस को मिटाने को, दियों में रोशनी भर दी।।


दिया है दुःख का बादल, तो उसने ही दवा दी है,
कुहासे को मिटाने को, उसी ने तो हवा दी है।
जो रहते जंगलों में, भीगते बारिश के पानी में,
उन्ही के वास्ते झाड़ी मे कुटिया सी छवा दी है।।


सुबह और शाम को मच्छर सदा गुणगान करते हैं,
जगत के उस नियन्ता को, सदा प्रणाम करते हैं।
मगर इन्सान है खुदगर्ज कितना आज के युग में ,
विपत्ति जब सताती है, नमन शैतान करते है।।

14 टिप्‍पणियां:

  1. बहाई ज्ञान की गंगा, मधुरता ईख में कर दी,
    कभी गर्मी, कभी वर्षा, कभी कम्पन भरी सरदी।
    किया है रात को रोशन, दिये हैं चाँद और तारे,
    अमावस को मिटाने को, दियों में रोशनी भर दी।।

    बहुत सुंदर रचना. शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  2. ईश्वर की वंदना के साथ साथ...इंसान की फितरत को बताती सुन्दर रचना.....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर


    bahut khub


    shekhar kumawat


    http://kavyawani.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  4. सही कहा, ईश्वर के बनाये हुये पुतले ही हैं हम सब.

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहाई ज्ञान की गंगा, मधुरता ईख में कर दी,
    कभी गर्मी, कभी वर्षा, कभी कम्पन भरी सरदी।
    किया है रात को रोशन, दिये हैं चाँद और तारे,
    अमावस को मिटाने को, दियों में रोशनी भर दी।।


    sarveshwar ko naman karti bahut hi sundar rachna.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत बढ़िया बेहतरीन कहा आपने ..शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  7. दिया है दुःख का बादल, तो उसने ही दवा दी है,
    कुहासे को मिटाने को, उसी ने तो हवा दी है।
    जो रहते जंगलों में, भीगते बारिश के पानी में,
    उन्ही के वास्ते झाड़ी मे कुटिया सी छवा दी है।।


    बहुत सुंदर पंक्तियाँ..... दिल को छू गयीं...

    आभार..

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर सार्थक रचना है डाक्टसा...

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने ! दिल को छू गयी आपकी ये शानदार रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  10. कवि का सत्य से साक्षात्कार दिलचस्प है।

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर रचना है ! बधाई ! इन्सान को भगवान से ज्यादा शैतान पसंद है क्या करें ...

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails