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शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010

“धीरे-धीरे आओ : एमिली डिकिंसन” (अनुवादक:डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

Come slowly:Emily Dickinson
अनुवादक : डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”
मेरे हैं अनछुए ओंठ
तुम छू लो धीरे से आकर!
जैसे मधु की मक्खी
हो जाती है मदहोश 
चमेली की सुगन्ध को पाकर!!
घूमती उसके चारों ओर!
खिंची आती है वो बिनडोर!!
कुछ विलम्ब ही सही
पहुँच जाती प्रसून के पास!
करा देती अपना आभास!!
रिझाती उसको कर गुंजार!
प्रकट कर देती सच्चा प्यार!!
शहद का करती है आकलन
और सुध-बुध खो देती है!
मधुर चुम्बन ले लेती है!!
Emily Dickinson


जन्म 10 दिसम्बर, 1830      
मृत्यु 15 मई, 1886

9 टिप्‍पणियां:

  1. क्योंकि मैंने अंग्रेजी में कवितायें बहुत कम पढ़ी हैं..

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  2. सर, मेरी एक विनती है कि मूल अंग्रेजी अनुवाद भी दे दें तो और अधिक मजा आयेगा... यह व्यक्तिगत विनती है..

    उत्तर देंहटाएं
  3. मधुमक्‍खी की तरह गुणों रूपी मिठास एकत्र करते रहें।

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्या कहने बहुत बढ़िया !
    बहुत बहुत आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर....शहद जैसी मिठास लिए ये अनुवाद ....आपको इसके लिए बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  6. @ भारतीय नागरिक - Indian Citizen जी!
    कविता का नाम तो दिया ही है!
    आपके पास तो नेटरूपी औजार है!
    सर्च करों और मज़ा लो मूल कविता का!

    उत्तर देंहटाएं
  7. मन को मीत बना लेने में सक्षम सुंदर कविता!

    उत्तर देंहटाएं
  8. अनुवाद केवल उसके लिए किया जाता है,
    जो रचना की मूल भाषा से अनभिज्ञ होता है!

    उत्तर देंहटाएं
  9. ्बहुत सुन्दर और भावपूर्ण अनुवाद्।

    उत्तर देंहटाएं

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