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मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

“एक नई! एक पुरानी!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

कौंध गई बे-मौसम,
चपला नीलगगन में!
अनहोनी की आशंका,
गहराई मन में!! 


तेजविहीन हुए तारे,
चन्दा शर्माया!
गन्धहीन हो गया सुमन,
उपवन अकुलाया!!


रंग हुए बदरंग,
अल्पना डरी हुई है!
भाव हुए हैं भंग
कल्पना मरी हुई है!!


खलिहानों में पड़े हुए
गेहूँ सकुचाए!
दीन-किसानों के
चमके चेहरे मुर्झाए!! 


वही समझ सकता है,
जिसकी है यह माया!
कहीं गुनगुनी धूप,
कहीं है शीतल छाया!!
जो हैं कोमल-सरल उनको मेरा नमन। 
जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।। 


पेड़ अभिमान में थे अकड़ कर खड़े, 
एक झोंके में वो धम्म से गिर पड़े, 
लोच वालो का होता नही है दमन। 
जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।। 


सख्त चट्टान पल में दरकने लगी, 
जल की धारा के संग में लुढ़कने लगी,
छोड़ देना पड़ा कंकड़ों को वतन।
जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।



घास कोमल है लहरा रही शान से, 
सबको देती सलामी बड़े मान से,
आँधी तूफान में भी सलामत है तन।
जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।

18 टिप्‍पणियां:

  1. waah bahut hi lajawaab rachna...
    http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  2. पेड़ अभिमान में थे अकड़ कर खड़े,
    एक झोंके में वो धम्म से गिर पड़े,
    लोच वालो का होता नही है दमन।
    जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।

    उम्दा सीख शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  3. जो हैं कोमल-सरल उनको मेरा नमन। .....

    Wonderful creation !

    उत्तर देंहटाएं
  4. तेजविहीन हुए तारे,
    चन्दा शर्माया!
    गन्धहीन हो गया सुमन,
    उपवन अकुलाया!!
    ...बहुत बढिया शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  5. खलिहानों में पड़े हुए
    गेहूँ सकुचाए!
    दीन-किसानों के
    चमके चेहरे मुर्झाए!!



    बहुत सुंदर पंक्तियों के साथ .....कविता बहुत अच्छी लगी....



    आभार....

    उत्तर देंहटाएं
  6. नयी और पुराणी दोनों रचनाएँ लाजवाब....जीवन में सार्थकता प्रदान करने वाली...

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर कविता शास्त्री जी. धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  8. Sir Ji..aap sabhi baton ko bahut assani se kah jate hai ....yahi aap ki khaas baat hai...

    उत्तर देंहटाएं
  9. "सख्त चट्टान पल में दरकने लगी,
    जल की धारा के संग में लुढ़कने लगी,
    छोड़ देना पड़ा कंकड़ों को वतन।
    जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।

    aapki her rachana khubsurat hoti hai sir

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  10. वही समझ सकता है जिसकी यह माया ...
    कहीं धूप तो कही छाया ...
    बहुत ही बढ़िया ...

    जो कोमल -सरल उनको नमन
    घमंडियों का होगा पतन ...
    क्या बात कह दी ....

    उत्तर देंहटाएं
  11. अपने शुभचिन्तकों और मित्रों के अनुरोध पर
    विवादास्पद टिप्पणियाँ हटा दी गईं हैं!

    उत्तर देंहटाएं

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