"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010

“कभी मत रहा कीजिए” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

कुछ कहा कीजिए, कुछ सुना कीजिए! 
मौन इतना कभी मत रहा कीजिए!! 


गम को मिल-बाँटकर, बोझ हल्का करो,  
बेहिचक बात पर तप्सरा कीजिए! 
मौन इतना कभी मत रहा कीजिए!! 


गैर तुम भी नहीं, गैर हम भी नही, 
चाँद को बादलों से रिहा कीजिए! 
मौन इतना कभी मत रहा कीजिए!! 


जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा, 
प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए! 
मौन इतना कभी मत रहा कीजिए!! 


मुद्दतों बाद गुलशन में गुल हैं खिले, 
देख कर के बगीचा हँसा कीजिए! 
मौन इतना कभी मत रहा कीजिए!! 


मन नहीं कम है दैरो-हरम से प्रिये! 
रोज ही इसमें आते रहा कीजिए! 
मौन इतना कभी मत रहा कीजिए!!

10 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ दिल की बातें कहा किजिये
    कुछ दिल की सुना किजिये
    गैरों को अपना कहा किजिये
    मौन हरदम कभी मत रहा किजिये
    एक बहुत ही उम्दा प्रस्तुति……………।

    उत्तर देंहटाएं
  2. जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा,
    प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए!
    मौन इतना कभी मत रहा कीजिए!!


    बहुत सुंदर पंक्तियाँ.... दिल को छू गई....

    उत्तर देंहटाएं
  3. हम तो हमेशा से आपके पावर वाले पंखे हैं...
    बहुत अच्छे, वाह..
    महफूज जी को देखकर अच्छा लग रहा है...

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस ग़ज़ल में हिंदी और उर्दू के शब्दों का
    अच्छा तालमेल है!
    --
    यही इस ग़ज़ल की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है!

    उत्तर देंहटाएं
  5. गैर तुम भी नहीं, गैर हम भी नही,
    चाँद को बादलों से रिहा कीजिए!
    मौन इतना कभी मत रहा कीजिए!!

    शानदार रचना:बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  6. जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा,
    प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए!
    मौन इतना कभी मत रहा कीजिए!!

    बहुत खूबसूरत एहसास हैं....सच है कि बात चीत एक सशक्त माध्यम है आपस में समझाने का...

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे 10.04.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
    http://chitthacharcha.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  8. जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा,
    प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए!
    मौन इतना कभी मत रहा कीजिए!!

    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! बिलकुल सही बात है! शानदार और लाजवाब रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह सर वाह.....बात करने से ही बात बनती है....लंबा पसरा मौन कई बार घातक हो जाता है..

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails