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गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

“मेरी नदी एक कविता ” (अनुवादक : डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

"My River a poem"
: Emily Dickinson
अनुवादक :
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”
मेरी कविता, 
सरिता जैसी चलती है।
नीले सागर से,
जाकर यह मिलती है।
सिन्धु प्रतीक्षारत है
स्वागत करने को।
मुझे बुलाता
आलिंगन में भरने को।
धीर और गम्भीर
विनय का सागर है।
नदिया तो छोटी सी
जल की गागर है।
मैं कहती हूँ ले लो
मेरा तन और मन।
सागर सरिता का
होता है घर-आँगन!!
Emily Dickinsonemily dicksen

Born December 10, 1830  
Died May 15, 1886

13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर कविता का सुन्दर अनुवाद

    उत्तर देंहटाएं
  2. wow ...very nice

    unfortunately when i open this blog in IE ...it crashed and when i opened in MaxThon (another browser) ..it does open but upon clicking the comment button ..it opened some weired website ...pls dekh lena kuch ulta seedha to nahi laga rakhaa ...thought to tell u my expereince...

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह....जितनी खूबसूरत कविता उतना ही सुन्दर अनुवाद....आनंद आया पढ़ कर...

    उत्तर देंहटाएं
  4. @ राम त्यागी जी!
    मेरे यहाँ तो सब कुछ ठीक ही खुल रहा है!

    उत्तर देंहटाएं
  5. bahut sundar rachna

    acha laga pad kar

    shekhar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  6. मुझे बुलाता
    आलिंगन में भरने को।
    धीर और गम्भीर

    bahut khub

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत बढिया रचना, अनुवाद बहुत ही सुंदर.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  8. @ डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी !
    मेरे ब्लाग पर टिप्पणी कर मेरा उत्साह वर्धन किया-धन्यवाद ! आपकी रचना सारगर्भित विचरों से ओत-प्रोत है- बधाई!

    उत्तर देंहटाएं

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