"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शनिवार, 17 अप्रैल 2010

“बीमार गुलाब:William Blake” " (अनुवादक-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

The Sick Rose
: William Blake
 
अनुवादक: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”
पारंगत निष्णात कला में,
ओ गुलाब तू!
एक कीट अदृश्यमान सा,
ओ गुलाब तू!


रजनी की काली छाया में,
लरज़ रहा है!
उड़ती हुई मक्खियों जैसा,
गरज़ रहा है!


सुर्ख खुशी पसरी हैं,
तेरे बिछे हुए बिस्तर में!
महक अनोखी आती है,
भीनी-भीनी चादर में!


लेकिन इस कोमल शैय्या में,
गुप्त-प्रेम का तम छाया है!
ओ गुलाब! तू इसी लिए तो,
रोगी कहलाया है!


तुझे प्रेम के कीड़े ने,
बीमार बनाया है!
ओ गुलाब! बस इसी लिए तू,
रोगी कहलाया है!
William Blake
William Blake (1757 - 1827)
(1757 - 1827)

14 टिप्‍पणियां:

  1. अरे वाह्……………………॥बहुत ही सुन्दर अनुवाद जो अनुवाद कम और कविता का प्राण ज्यादा लग रहा है और शायद यही तो आपकी खासियत है………………गज़ब का लेखन्…………………।बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  2. kya bat he


    gulab ke itne rang

    pahli bar pade hamne

    shekhar kumawat
    http://kavyawani.blogspot.com/\

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेहतरीन अनुवाद
    मजा आया

    उत्तर देंहटाएं
  4. बढिया है. लेकिन हमें आपकी रचनायें पढने में ही ज़्यादा मज़ा आता है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत बढ़िया.. जब अनुवाद भी सुन्दर हो तो और मजा आता है...

    उत्तर देंहटाएं
  6. प्रेम-कीट तो है गुलाब,
    पर बहुत अनोखा है,
    इसके काटे का दर्द
    हमेशा मीठा होता है!

    उत्तर देंहटाएं
  7. अनुवाद की शृंखला
    पूरी सफलता
    के साथ
    पूरे चरमोत्कर्ष पर है!

    उत्तर देंहटाएं

  8. समस्त अनूदित रचनाओँ के कवि
    हमेशा मयंक जी के ऋणी रहेंगे!

    उत्तर देंहटाएं
  9. तुझे प्रेम के कीड़े ने,
    बीमार बनाया है!
    ओ गुलाब! बस इसी लिए तू,
    रोगी कहलाया है!

    बहुत सुन्दर अनुवाद...कविता भी चुन कर ली है....सुन्दर कविताओं के सुन्दर अनुवाद के लिए आभार

    उत्तर देंहटाएं
  10. " bahut hi accha anuvad "

    " gulaab ke itane saare rang "

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  11. ओ गुलाब ...तू इसलिए रोगी कहलाया है ...
    सुन्दर कविता का बेहतरीन अनुवाद ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  12. यह केवल अनुवाद नहीं है ... आपने तो उस कविता का सार अपने अनुवाद में ले आया है ! अति उत्तम !

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुन्दरता से आपने अनुवाद किया है! बढ़िया लगा रचना!

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails