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शुक्रवार, 14 मई 2010

“आदमी की हबस” (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

“एक पुरानी कविता”

जिन्दगी क्या मौत पर भी,
अब हबस छाने लगी।
आदमी को, आदमी की

हबस ही खाने लगी।।

हबस के कारण, यहाँ
गणतन्त्रता भी सो गई।
दासता सी आज,

आजादी निबल को हो गई।।

पालिकाओं और सदन में,
हबस का ही शोर है।
हबस के कारण, बशर

लगने लगा अब चोर है।।

उच्च-शिक्षा में अशिक्षा,
हबस बन कर पल रही।
न्याय में अन्याय की ही,

होड़ जैसी चल रही।।

हबस के साये में ही,
शासन-प्रशासन चल रहा।
हबस के साये में ही नर,

नारियों को छल रहा।।

डॉक्टरों, कारीगरों को,
हबस ने छोड़ा नही।
मास्टरों ने भी हबस से,

अपना मुँह मोड़ा नही।।

बस हबस के जोर पर ही,
चल रही है चाकरी।
कामचोरों की धरोहर,

बन गयी अब नौकरी।।

हबस के बल पर हलाहल,
राजनीतिक घोलते।
हबस की धुन में सुखनवर,

पोल इनकी खोलते।।

चल पड़े उद्योग -धन्धे,
अब हबस की दौड़़ में।
पा गये अल्लाह के बन्दे,

कद हबस की होड़ में।।

राजनीति अब, कलह और
घात जैसी हो गयी।
अब हबस शैतानियत की,

आँत जैसी हो गयी।।

19 टिप्‍पणियां:

  1. अत्यंत मार्मिक काव्य..........

    प्रणाम !

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सही और सच्चा दृश्य प्रस्तुत किया है....ना जाने ये हवस क्या क्या ले डूबेगी...

    उत्तर देंहटाएं
  3. शास्त्री जी आप का कथन सत्य है ...
    क्रुप्या हबस को हवस कर लीजियेगा ...!!!!

    सुन्दर रचना के लिये साधुवाद ...!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दरता से आपने सही दृश्य को प्रस्तुत किया है! शानदार रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  5. शास्त्री जी,बहुत ही शानदार रचना!प्रणाम !

    उत्तर देंहटाएं
  6. शास्त्री जी,बहुत ही शानदार रचना!प्रणाम !

    उत्तर देंहटाएं
  7. आदमी को, आदमी की
    हबस ही खाने लगी।।
    सुन्दर सबक देती रचना

    उत्तर देंहटाएं
  8. na jaane ye havas kis kis ko le dubegi magar phi rbhi kam na hogi.........bahut sundar likha hai.

    उत्तर देंहटाएं
  9. जिन्दगी क्या मौत पर भी,
    अब हबस छाने लगी।
    आदमी को, आदमी की
    हबस ही खाने लगी।।

    राजनीति अब, कलह और
    घात जैसी हो गयी।
    अब हबस शैतानियत की,
    आँत जैसी हो गयी।।

    राजनीती और जिंदगी सहित विभिन्न पहलुओ पर आपने जिस तरह अपनी कविता के माध्यम से हवस छाने की बात कही है, बहुत सही कही है. विचारनीय के साथ साथ मार्मिक कविता. जिस सुन्दरता के साथ आपने यह कविता लिखी है उतनी ही सफाई से सभी पर जो कटाक्ष किये है उसके लिए आप बधाई के पात्र है. सादर नमन.

    लगता है आज कल आप व्यस्त चल रहे है. इसीलिए मेरी गुफ्तगू में शामिल नहीं हो रहे. मुझे इन्तजार रहता है. हौसला बढाने आते रहा करो.

    उत्तर देंहटाएं
  10. अच्छी प्रस्तुति ..... सच्चा और सही-सही उकेरा है ....आज की भीषण समस्या को ....हर किसी को कुछ -ना कुछ हवस है ....धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  11. कौन है श्रेष्ठ ब्लागरिन
    पुरूषों की कैटेगिरी में श्रेष्ठ ब्लागर का चयन हो चुका है। हालांकि अनूप शुक्ला पैनल यह मानने को तैयार ही नहीं था कि उनका सुपड़ा साफ हो चुका है लेकिन फिर भी देशभर के ब्लागरों ने एकमत से जिसे श्रेष्ठ ब्लागर घोषित किया है वह है- समीरलाल समीर। चुनाव अधिकारी थे ज्ञानदत्त पांडे। श्री पांडे पर काफी गंभीर आरोप लगे फलस्वरूप वे समीरलाल समीर को प्रमाण पत्र दिए बगैर अज्ञातवाश में चले गए हैं। अब श्रेष्ठ ब्लागरिन का चुनाव होना है। आपको पांच विकल्प दिए जा रहे हैं। कृपया अपनी पसन्द के हिसाब से इनका चयन करें। महिला वोटरों को सबसे पहले वोट डालने का अवसर मिलेगा। पुरूष वोटर भी अपने कीमती मत का उपयोग कर सकेंगे.
    1-फिरदौस
    2- रचना
    3 वंदना
    4. संगीता पुरी
    5.अल्पना वर्मा
    6 शैल मंजूषा

    उत्तर देंहटाएं
  12. कौन है श्रेष्ठ ब्लागरिन
    पुरूषों की कैटेगिरी में श्रेष्ठ ब्लागर का चयन हो चुका है। हालांकि अनूप शुक्ला पैनल यह मानने को तैयार ही नहीं था कि उनका सुपड़ा साफ हो चुका है लेकिन फिर भी देशभर के ब्लागरों ने एकमत से जिसे श्रेष्ठ ब्लागर घोषित किया है वह है- समीरलाल समीर। चुनाव अधिकारी थे ज्ञानदत्त पांडे। श्री पांडे पर काफी गंभीर आरोप लगे फलस्वरूप वे समीरलाल समीर को प्रमाण पत्र दिए बगैर अज्ञातवाश में चले गए हैं। अब श्रेष्ठ ब्लागरिन का चुनाव होना है। आपको पांच विकल्प दिए जा रहे हैं। कृपया अपनी पसन्द के हिसाब से इनका चयन करें। महिला वोटरों को सबसे पहले वोट डालने का अवसर मिलेगा। पुरूष वोटर भी अपने कीमती मत का उपयोग कर सकेंगे.
    1-फिरदौस
    2- रचना
    3 वंदना
    4. संगीता पुरी
    5.अल्पना वर्मा
    6 शैल मंजूषा

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