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शनिवार, 15 मई 2010

“सूखे हुए छुहारे, उनको लुभा गये हैं” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“प्रियवर अलबेला खत्री जी को समर्पित”

chhuharaअंगूर के सभी गुण,
किशमिश में आ गये हैं!
सूखे हुए छुहारे,
उनको लुभा गये हैं!!


बूढ़े हुए तो क्या है,
मन में भरा है यौवन,
गीतों के जाम में ही,
ढाला हुआ है जीवन,
इस उम्र में भी हम तो,
दुनिया को भा गये हैं!
सूखे हुए छुहारे,
उनको लुभा गये हैं!!


हम तो नवल-नवेले,
थाली के हम हैं बेले,
काँसे की हम खनक में,
नाचे हैं और खेले,
उनकी नजर में हम तो,
ब्लॉगिंग में छा गये हैं!
सूखे हुए छुहारे,
उनको लुभा गये हैं!!


ठेले हैं शब्द हमने,
कुछ जोड़-तोड़ करके,
व्यञ्जन परोसते हैं,
हम तोड़-मोड़ करके,
उनके ही शीर्षक से,
यह राग पा गये हैं!
सूखे हुए छुहारे,
उनको लुभा गये हैं!!

18 टिप्‍पणियां:

  1. वाह प्रभु वाह !

    मैंने चैतन्य महा प्रभु को नहीं देखा लेकिन आप जैसे महाप्रभु की चैतन्यता ने निहाल कर दिया..आपका शिष्यत्व स्वीकार करलूं और वहीँ उत्तराखंड में ही कहीं रहने लगूं.....ऐसे विचार मानस में धींगा-मुश्ती करने लगे हैं ..कहिये क्या करूं ?

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी फ़ोटो देखकर तो
    कहीं पर से भी मुझे नहीं लगता
    कि आप सूखे हुए छुहारे हैं!
    --
    यह आशुगीत तो मेरे सामने ही रचकर
    पाँच मिनट के अंदर पोस्ट कर दिया गया!
    --
    मयंक जी कागज़ पर न लिखकर
    सीधे एडिट पोस्ट बॉक्स में लिखते हैं!
    --
    लिखते क्या हैं : चमत्कार करते हैं!

    --
    हँसी का टुकड़ा

    उत्तर देंहटाएं
  3. बूढ़े हुए तो क्या है,
    मन में भरा है यौवन,
    बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  4. बूढ़े हुए तो क्या है,
    मन में भरा है यौवन,
    गीतों के जाम में ही,
    ढाला हुआ है जीवन,
    इस उम्र में भी हम तो,
    दुनिया को भा गये हैं!

    बहुत बढ़िया.....मन हमेशा ऐसा ही रहना चाहिए....

    उत्तर देंहटाएं
  5. उतम-उतम-उतम भाई सुन्दर-सुन्दर-सुन्दरतम् भाई वाह पई वाह पई वाह

    उत्तर देंहटाएं
  6. jabse padhi ye kavita,
    Hum gun-guna rahe hain....

    Beautiful creation!..

    उत्तर देंहटाएं
  7. अभी तो मैं जवान हूँ .....................
    यही शास्त्री जी का मूल मंत्र है !!
    जय हो शास्त्री जी आपकी !!

    उत्तर देंहटाएं
  8. शास्त्रीजी ,
    आपने गीत अलबेलाजी को समर्पित किया है , आनन्द हम भी ले रहे हैं । कई बार तो आप वाकई कमाल कर देते हैं ।
    शब्द अपर्याप्त हैं आपकी ता'रीफ़ के लिए …
    आपके मन में चिर यौवन बना रहे …

    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    शस्वरं

    उत्तर देंहटाएं
  9. यही अदा तो ब्लॉग जगत को भा गई है...कविता और कविता में भाव पिरोना कोई आपसे सीखे...हम तो पहले से ही आपकी लेखनी के कायल थे...ये भी कमाल की रचना..बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत खूब .....सुन्दर रचना शास्त्री जी .

    उत्तर देंहटाएं

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