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सोमवार, 31 मई 2010

"आम रसीले भोले-भाले!!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

IMG_1296पकने को तैयार खड़े हैं!
शाखाओं पर लदे पड़े हैं!!
IMG_1295झूमर बनकर लटक रहे हैं!
झूम-झूम कर मटक रहे हैं!!

कोई दशहरी कोई लँगड़ा!
फजरी कितना मोटा तगड़ा!!
IMG_1300 बम्बइया की शान निराली!
तोतापरी बहुत मतवाली!!

 कुछ गुलाब की खुशबू वाले!
आम रसीले भोले-भाले!!

22 टिप्‍पणियां:

  1. भाई वाह इन तस्वीरों ने तो आम के स्वाद तक पहुंचा दिया !

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  2. चित्र और आमरस में डूबी कविता बहुत स्वादिष्ट लगी....

    उत्तर देंहटाएं
  3. kamaal karte hain aap bhi...kisi par kavita likh dete hain...!!
    bahut sundar...ab ham kahan jaayein..khaane ka man kar gaya...
    :)

    उत्तर देंहटाएं
  4. बम्बइया की शान निराली!
    तोतापरी बहुत मतवाली!!
    मुँह में तो पानी ला दिया

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर चित्र, मुहं मै पानी आ गया इअतने सुंदर सुंदर आम देख कर. ओर आप की रसीली कविता पढ कर. धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  6. moonh mein pani aa gaya..........ab pahle kha lein phir comment karenge.

    उत्तर देंहटाएं
  7. लालच आ गया स्वादिष्ट कविता पढ़कर.

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी कविता...( रचनाएँ रचवाती हो ) ...चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर मंगलवार १.०६.२०१० के लिए ली गयी है ..
    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  9. खूबसूरत चित्रों के साथ आमों की बहार छाई हुई है ... आपने बहुत ही मधुर अंदाज़ में शब्दों में बाँधा है इस मीठे आम को ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. मयंक जी, कविता के आरम्भ में "भोले भाले आम एक आम" आदमी की तरफ इशारा करते है
    जिनको आम की तरह चूसा जाता है |आम का स्वाद मिल गया |

    उत्तर देंहटाएं
  11. वाह शास्त्री जी..दिल बाग बाग हो गया:-)
    अब तो बाजार जाकर आमों की खरीदारी करनी ही पडेगी....

    उत्तर देंहटाएं
  12. शास्त्रीजी,
    गर्मी की छुट्टियां क्या आयीं, शामत आ गई ! पिछले दिनों यात्राओं और व्यस्तताओं से घिरा रहा ! आपके ब्लॉग पर आने का मौक़ा ही नहीं मिला. लेकिन आप नहीं चूकते ! रेणुजी वाले संस्मरण पर आपका आशीर्वाद मिला, मन प्रसन्न हुआ !
    कविता पढ़कर पटना के मालदा की याद आ गई ! तस्वीरें तो बला की सुन्दर हैं, मन करता है, झपट पडूँ इन पर !
    ऐसी ही कृपा बनाए रखें !
    सादर--आ.

    उत्तर देंहटाएं
  13. वाह शास्त्री जी इतने सुन्दर आम देखकर तो रहा नहीं जा रहा है! पेड़ तो आम से भर गया है और रसीले आम की तस्वीर के तो क्या कहने! शानदार रचना और बेहद सुन्दर चित्र!

    उत्तर देंहटाएं

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